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“A Picnic Party” in Hindi Language

एक पिकनिक पार्टी । Article on “A Picnic Party” in Hindi Language!

यह जुलाई का महीना था मैं एवं मेरे कुछ मित्रों ने एक पिकनिक पार्टी मनाने की योजना बनाई । कुतुब-मिनार को पिकनिक पार्टी के लिये चुना गया । इस स्थल को चुनने के दो कारण थे एक तो यह कि इससे एक ऐतिहासिक स्थल के दर्शन हो जाते दूसरा भ्रमण क्योंकि कुतुब-मिनार दिल्ली के बाहरी हिस्से में स्थित है ।

हमने अपना सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन एवं सांय कालीन चाय वहां लेने की योजना बनायी । दिन बहुत सुहाना था । बादल सुबह से ही आकाश में मंडरा रहे थे । हम सुबह नौ बजे कुतुब-मिनार पहुँच गये । हमने स्टोव जलाकर चाय बनाई एवं नाश्ता किया । हमारे पास कुछ संगीत के उपकरण थे जैसे: हारमोनियम, सितार एवं ट्रांजिसटर ।

नाश्ते के पश्चात् मेरे एक मित्र सुधीर ने हारमोनियम बजाया और उसने उस पर दो गीत गाये जो बहुत ही मोहक थे । उससे हमारी आत्मा प्रसन्न हो गयी । कुतुब के चारों हरे-भरे घास के मैदानों एवं छायादार वृक्षों ने इस को भरपूर सौन्दर्य प्रदान किया  है ।

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तत्पश्चात् मेरे मित्र राकेश ने हमें कुतब के चारों ओर एक चक्कर लगाने का परामर्श दिया । हमने दो मित्रों को दोपहर का भोजन बनाने के लिये वही छोड़कर जाने का निश्चय लिया ।  हम वहां सुन्दर फूलों एवं सुन्दर घास के मैदान आनन्द उठा रहे थे तो हमें एक विदेशी जोड़ा मिला । वह खंडहर हुये इस स्मारक के फोटो खींच रहे थे ।

उन्होंने हमसे कुछ प्रश्न पूछे और हमने अपने देश के अन्य स्मारकों के विषय में भी कुछ बताया । हमने इस बातचीत का पूरा आनन्द उठाया । हम अपने पिकनिक स्थल पर वापिस आये तो सब कुछ तैयार       था । हमने पेट भर कर स्वादिष्ट भोजन किया । इसी बीच वहां एक मदारी आ गया जिसके साथ बन्दर एवं लंगूर भी थे ।

उन्होंने ऐसी-ऐसी हरकतें एवं करतब दिखाये कि हम हैरान रह गये । उसके अजीब-गरीब मुंह बनाने पर हम खूब हंसे । मदारी ने डमरू की लय पर बन्दर को खूब नचाया जिसने दर्शकों का मन मोह लिया । खेल समाप्त होन पर सभी ने अपने-अपने सामर्थ्य अनुसार कुछ पैसे दिये ।

इसके पश्चात् हमने कुछ कविताओं, चुटकुलों एवं गीतों का लुत्फ उठाया । सुधीर ने मधुर ध्वनि में गीत एवं गजल गाकर खूब वाहवाही लूटी । उसका गीत सुनने के लिये अन्य पर्यटक भी हमारे आस-पास जमा हो गये । इसी दौरान हमारे कुछ मित्र सपनों की दुनिया में खो गये और विश्राम करने लगे ।

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सुधीर और मैंने सायंकालीन कॉफी तैयार करनी प्रारम्भ की । हमने कुछ चटपटी चीजे और पकौड़े वगैरह तले । पकौड़ों की सुगन्ध से मित्र जाग गये और हमने पकौड़ों एवं कॉफी का मजा लूटा । साथ-साथ चुटकले, चुहुल बाजी एवं अंताक्षरी भी चलती रही ।

हंसते खेलते समय कब बीत गया पता नहीं चला । पाँच बज रहे थे अन्य पिकनिक पार्टियों को अपना समान बांधते देख हमें भी घर जाने का ख्याल आया । हमने भी अपने बर्तन एवं अन्य समान को ठीक से पैक कर अपनी साईकिलों पर रखा । उसके बाद हम बातें करते, गप-शप करते, हंसते मुस्कूराते घर की ओर निकल पड़े ।

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