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“Pre-Winter Season” in Hindi Language

हेमन्त ऋतु । “Pre-Winter Season” in Hindi Language!

1. प्रस्तावना ।

2. महत्त्व ।

3. उपसंहार ।

1. प्रस्तावना:

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समस्त प्राणी समाज को अपने ठण्डे-ठण्डे झोंकों से ठिठुराती-कंपकपाती शिशिर ऋतु जब प्रकृति से विदा लेती है, तो आ जाती है-हेमन्त । इसे पतझड़ की भी कहते हैं । हेमन्त का आगमन समस्त प्रकृति एवं मानव-समाज के लिए एक अनूठा सन्देश होता है ।

2. महत्त्व:

हेमन्त का आगमन होते ही पेड़ों से पत्ते झड़ने लगते हैं । पके हुए पीले-पीले पत्ते पेड़ों से गिरते हैं, ताकि नये पत्ते उसकी जगह ले सकें । नवीनता का नया सन्देश देने वाली यह ऋतु प्राकृतिक दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण है ।

पेड़ों से पत्ते झड़ने का प्राकृतिक कारण है कि वृक्षों की वाष्पोत्सर्जन की क्रिया को सीमित किया जाये, ताकि वृक्ष पानी की कमी की क्षति को पूरा कर सकें । प्रकृति की इस क्रिया के पीछे यह उद्देश्य है कि पेड़ों द्वारा त्यागे गये पत्ते वृक्ष को पानी से होने वाली कमी से अनुकूलन करा सकें ।

पुराने, जर्जर, पके हुए पत्ते जब अपना स्थान छोड़ते हैं, तब उनका स्थान नये-नये पत्ते ले लेते हैं । वृक्षों से फूटी हुई नयी कोंपलें वृक्ष को पूर्ण यौवन प्रदान करती हैं, साथ ही उसकी जीवनी तथा प्राणशक्ति को बढ़ा देती हैं ।

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वृक्षों से गिरे हुए ये पत्ते वर्षा ऋतु में भूमि की नयी परत बनाने में मदद करते हैं । नवीन पौधों का अंकुरण भूमि की इस नयी परत में ही बड़ी सरलता से होता है । इस में सूर्य का ताप क्रमश: बढ़ने लगता है, जिससे सभी जीवधारियों को ठण्ड से काफी-कुछ राहत मिल जाती है ।

हेमन्त का सम्बन्ध मानव-जीवन दर्शन से है, जो इस सांसारिक दर्शन से हमारा साक्षात्कार कराती है कि मनुष्य का जीवन क्षणभंगुर है, नाशवान है । जिस तरह से पेड़ों के पत्ते अपना सम्पूर्ण जीवन जीने के उपरान्त मिट्टी में मिल जाते हैं, उसी तरह मानव-जीवन भी नश्वर है ।

कबीरदासजी ने तो मानव-जीवन की इसी नश्वरता पर प्रकाश डालते हुए वृक्ष के पके पत्ते से इसकी तुलना करते हुए यह दोहा लिखा है:

मानुष देह दुर्लभ है, देह न बारम्बार ।

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तरूवर से पत्ता झरया लागे न बहुरि डार ।।

पुराने चीजों की जगह ही नवीन चीजों को स्थान मिलेगा । विकास की यही गति है, यही प्रक्रिया है । मनुष्य का जीवन पके हुए पत्ते की तरह है, यही हमारे जीवन का सत्य है । हेमन्त ऋतु एक प्रकार से प्रकृति की नवीनता की सूचक है । उसके लिए अपनी जमीन वह तैयार भी करती है ।

4. उपसंहार:

प्रकृति की अन्य ऋतुओं की तरह हेमन्त ऋतु का अपना अलग ही महत्त्व है । यह ऋतु जहां प्राचीनता के मोह को छोड़ने तथा नवीनता के आग्रह का सन्देश देती है, वहीं यह सन्देश देती है कि परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है ।

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