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Main Groups of Cloth Design | Home Science

Read this article in Hindi language to learn about the two main groups of cloth design. The groups are: 1. Structural Design 2. Decorative Design.

यदि आप विभिन्न वस्त्रों को ध्यानपूर्वक देखेंगे तो आपको निम्न बातें ज्ञात होंगी:

i. हर प्रत्येक कपड़े की बुनाई भिन्न होती है ।

ii. इनकी संरचना व छापों के बने हुये कपड़े भिन्न दिखाई देते हैं ।

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वस्त्रों में मुख्य रूप से डिजायन दो प्रकार की देखी जाती है:

 


(1) रचनात्मक डिजाइन (Structural Design):

इसे बनावटी डिजाइन भी कहते है । इस डिजाइन के अनुसार कपड़ों के भिन्न-भिन्न टुकड़ों को जोड़कर परिधान बनाया जाता है ।

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उदाहरण: थोक, कॉलर, कफ, छोटी-छोटी झालरदार फ्राकें, कई  प्लेटें डालकर स्कर्ट बनाना आदि ।

(2) अलंकृत डिजाइन (Decorative Design):

वस्त्रों को तैयार करने के पश्चात् उन पर विभिन्न प्रकार की सजावट की जाती है ताकि वे पहनने के पश्चात् सुन्दर दिखें । इन डिजाइनों को अलंकृत डिजाइन कहते है ।

उदाहरण: विभिन्न प्रकार के लेसों से वस्त्र को अलंकृत करना, सुन्दर व आकर्षक बटन टाँकना, नाना प्रकार के रंगीन धागों से अलंकृत करना, परम्परागत डिजाइन बनाना, रंगों से चित्रकारी करना, विभिन्न प्रकार के गोटों व गोटे के फूलों व रंग-बिरंगी लटकानी से कपड़ों को सजाना ।

कपड़ों को सजाने के लिये देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग अलंकृत डिजाइनें की जाती हैं । महिलाओं द्वारा उपयोग की जाने वाली साड़ियों के किनारे-किनारे लेस या बार्डर लगाकर उसे अलंकृत किया जाता 

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है ।

अलंकृत डिजाइन दो प्रकार की होती है जो निम्नलिखित हैं:

(i) व्यावहारिक डिजाइन (Impractical Design):

यह डिजाइन किसी भी आकृति से मिलती-जुलती नहीं है, परन्तु इनको लाइनों, रंगों, संरचना व आकृति का उपयोग करके सुन्दर व आकर्षक बनाया जाता है । इस डिजाइन में उपयोग किये गये रेखाचित्रों में अधिकांशतया सीधी-टेढ़ी रेखाएँ, बिन्दियों, त्रिकोण, चौकोर, या वर्गाकार, छोटी-बड़ी बिन्दियाँ आदि का उपयोग करके डिजाइन बनाया जाता है ।

(ii) यथार्थ या स्टाइल (Natural or Style):

कुछ डिजाइन एकदम प्राकृतिक या सच लगते हैं जिससे आकर्षित होकर हमारा मन उनको छूने का होता है । साड़ी पर कमल/गुलाब के फूलों व पत्तियों की डिजाइन एकदम प्राकृतिक लगती है ये यथार्थवादी डिजाइन का सबसे अच्छा उदाहरण है । इन्हें पुष्प (Floral) डिजाइन भी कहते हैं । आजकल साड़ियों व वस्त्रों पर इनका अधिक प्रचलन है ।

कभी-कभी डिजाइनों में स्वतंत्र लाइनों का उपयोग करके उन्हें आकृतियों का रूप दिया जाता है जिनकी यथार्थ से तुलना नहीं हो सकती फिर भी ये अत्यन्त सुन्दर व आकर्षक दिखते हैं । अत: इनका उपयोग केवल आकर्षण के लिए किया जाता है । इनका प्रयोग स्वतंत्र व लयपूर्ण डिजाइनों में भी करते हैं ।

आवश्यकतानुसार इन डिजाइनों का आकार बदला जा सकता है जैसे: छोटा, मध्यम व बड़ा । डिजाइन का आकार तथा डिजाइन सुन्दर, आकर्षक व प्रभावशाली बने, यह उपयोग किये गये कपड़े की सतह पर निर्भर करता है ।

अत: यह स्पष्ट होता है कि डिजाइन को प्रभावशाली बनाने के लिये उसे आकार, रूप और रंग की सीमा में किसी प्रकार से भी बाँधा नहीं जा सकता है । सभी प्रकार की डिजाइनों में एक मुख्याप्रधान रूपांकन इकाई होती है जो समांतर, लंबतर या किनारों पर बार-बार बनायी जाती है ।

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