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9 Main Stages of Development in a Child | Home Science

Read this article in Hindi language to learn about the nine main stages of development in the child. The stages are: 1. Physical Development 2. Mental Development 3. Motor Development 4. Emotional Development 5. Cognitive Development 6. Social Development 7. Moral Development 8. Language Development 9. Character Development.

किसी भी बालक का विकास केवल एक ही क्षेत्र में नहीं होता है, एक ही समय में अलग-अलग क्षेत्रों में उसका विकास चलता रहता है । किसी भी एक क्षेत्र में विकास पूर्ण रहने पर दूसरे क्षेत्र में भी विकास अपूर्ण रह जाता है ।

Stage # 1. शारीरिक विकास (Physical Development):

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इसके अन्तर्गत बालक के शारीरिक अंगों में होने वाली वृद्धि लम्बाई, भार, हड्‌डियाँ माँसपेशियाँ तथा आन्तरिक अंगों के विकास का अध्ययन किया जाता है ।

Stage # 2. मानसिक विकास (Mental Development):

मानसिक विकास से तात्पर्य बुद्धि के विकास से है, जिसके आधार पर बालक वातावरण की वस्तुओं का ज्ञान प्राप्त करता है ।

Stage # 3. क्रियात्मक विकास (Motor Development):

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क्रियात्मक विकास से बालक अपने आप में आत्मनिर्भर बनता है ।

Stage # 4. संवेगात्मक विकास (Emotional Development):

संवेगात्मक विकास बालकों के विकास में अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है तथा सामाजिक समायोजन में भी सहायक होता है । संवेग अनेक प्रकार के होते हैं; जैसे: दया, प्रेम, प्रसन्नता, क्रोध, भय, घृणा, चिन्ता इत्यादि ।

Stage # 5. संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development):

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संज्ञानात्मक विकास से बालक में विभिन्न मानसिक प्रक्रियाओं के आधार पर जीवन से सम्बन्धित विभिन्न पहलुओं को समझने की क्षमता आती है ।

Stage # 6. सामाजिक विकास (Social Development):

सामाजिक विकास से बालक के भीतर सामाजिक व्यवहारों की उत्पत्ति होती है ।

Stage # 7.  नैतिक विकास (Moral Development):

नैतिक विकास किसी भी बालक में उसके घर से ही होता है, अत: आवश्यक है कि घर के बड़े लोगों का व्यवहार अच्छा हो ।

Stage # 8.  भाषा-विकास (Language Development):

भाषा के माध्यम से बालक अपने विचारों इच्छाओं तथा भावनाओं को दूसरों पर व्यक्त कर सकता है और दूसरों के विचारों तथा इच्छाओं को समझ सकता है ।

Stage # 9. चारित्रिक विकास (Character Development):

चारित्रिक विकास से बालक में आत्म-नियन्त्रण की प्रवृत्ति के साथ-साथ कर्मनिष्ठता व उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है ।

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