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Biological Changes during Adolescence | Hindi

Read this article in Hindi language to learn about the major biological changes the occur during adolescence. The biological changes are: 1. Body Makeup 2. Sexual Growth 3. Height 4. Weight.

किशोरावस्था में शारीरिक परिवर्तन यौवनारम्भ से शुरू होता है । यौवनारम्भ से अर्थ है: यौन परिपक्वता का आरम्भ होना । यौवनारम्भ 11 या 12 वर्षों के आस-पास का समय है जो कि साधारणतया 2 वर्षों तक रहता है । इस अवस्था में शारीरिक अभिवृद्धि होती है और शरीर के आकार में परिवर्तन होने लगता है ।

इसके साथ-साथ शारीरिक विकास वेगपूर्वक होता है और यौवन के चिन्हों का दिखाई देना शुरू हो जाता है । इस अवधि में लगभग 75% वयस्क लम्बाई तथा 50% वयस्क वजन प्राप्त कर लेते हैं ।

प्रत्येक व्यक्ति के शरीर की संरचना एक विशेष संरचना होती है जिनके मुख्य कारक निम्न प्रकार हैं:

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i. आनुवंशिकता,

ii. वातावरण तथा पोषण ।

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किशोरावस्था में क्या शारीरिक परिवर्तन होता है ? (What Physical Changes Occur during Adolescence ?)

जैसा कि ऊपर बताया गया है कि यौवनारंभ (Puberty) शुरू होते ही किशोरों के शरीर में परिवर्तन आरम्भ हो जाता है जो अत्यन्त शीघ्र होता है । यौवनारम्भ वह काल है जब किशोरों के शरीर का विकास होने के साथ-साथ यौन अंग भी परिपक्व होते हैं ।

यह काल मुख्यतया 7-13 वर्ष तक की किशोरियों में तथा 9 से 14 वर्ष तक के किशोरों में दिखाई देता है ।

किशोर व किशोरियों की इस वृद्धि का सम्बन्ध मुख्यतया परिवार के इतिहास एवं पोषण से होता है:

(1) शरीर की बनावट (Body Makeup):

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लड़के:

लड़कों की माँसपेशियों व अस्थियों में वृद्धि होती है जिससे उनमें शक्ति अधिक आ जाती है । हाथ-पैर में उपस्थित वसा का ह्रास होता है । कन्धे चौड़े हो जाते हैं । आवाज भारी हो जाती है । चेहरे, जाँघों के पास, बगल के नीचे तथा अन्य भागों में बाल बढ़ने लगते हैं । शरीर की गंध वयस्क के समान हो जाती है तथा उनके मुँहासे (pimples or acne) निकलने लगते है ।

लड़कियाँ:

लड़कियों में लडकों से ज्यादा वसा जमा होती है । शरीर का विकास इस प्रकार होता है कि कमर पतली हो जाती है तथा नितम्बों में अधिक वृद्धि होती है जिससे वे बड़े दिखाई देते हैं । जनन अंगों तथा बगल के नीचे बाल आना शुरू हो जाते हैं । शरीर की गंध तथा आवाज में परिवर्तन होने के साथ मुँहासे भी निकलते हैं ।

(2) यौवनारम्भ (Sexual Growth):

(i) लड़के:

1-12 वर्ष की आयु में शिश्न या लिंग (Penis) तथा वृषण या शुक्र ग्रथियों (Testicles) का विकास होता है तथा वे आकार में बड़े होने लगते हैं परन्तु वृषणकोष (Scrotum) की ऊपरी पर्त पतली व लाल होने लगती है । 13 वर्ष की आयु तक लडकों में शुक्राणु (Spermatozoa) बनना शुरू होता है जिससे निरोपण (ejaculate) या रात्रिदोष शुरू होता है । इसके साथ ही चेहरे पर बाल बढ़ने के साथ, जननांगों पर भी बाल अधिक हो जाते हैं जिससे वहाँ की त्वचा भूरी या काली हो जाती है ।

रात्रिदोष क्या है ?– इसे नोकटर्नल उत्सर्जन भी कहते हैं, जिसमें रात में निद्रा के समय लिंग से अतिरिक्त वीर्य का स्राव होता है । नोकटर्नल उत्सर्जन या रात्रिदोष की शुरुआत व आवृत्ति प्रत्येक वयस्क में अलग-अलग होती है । यह एक सामान्य व प्राकृतिक क्रिया है ।

(ii) लड़कियाँ:

किशोरावस्था में लड़कियों के स्तन का विकास शुरू हो जाता है जो कि 8-13 वषे की आयु से होता है । इसके करीब दो वर्ष बाद लड़कियों में रजोधर्म (मासिक स्राव) शुरू हो जाता है । कुछ लड़कियों मे रजोधर्म देर से भी शुरू हो सकता है । शुरू के एक-दो वर्ष तक मासिक स्राव अनियमित हो सकता है ।

मासिक स्राव प्रति मास होता है तथा इसका काल चक्र (cycle) 28 दिनों का होता है जोकि 21-35 दिनों के बीच हो सकता है । 45-55 वर्ष की आयु तक रजोधर्म समाप्त हो जाता है । मासिक स्राव के समय एक-एक अंडाणु परिपक्व होकर अंडाशय में प्रवेश करता है इस क्रिया को अंगोत्सर्जन कहते हैं । यह क्रिया रजोधर्म के लगभग मध्य चक्र में होती है ।

अंडाशय द्वारा अंडाणु के छोड़े जाने के पूर्व गर्भाशय अतिरिक्त रक्त तथा ऊतक से भीतरी झिल्ली का निर्माण करता है । यदि इस समय अंडाणु शुक्राणु से मिलता है तो गर्भाशय की यह झिल्ली  भ्रूण के विकास में सहायक होती है ।

परन्तु यदि अंडाणु (ovum) नहीं होता तो गर्भाशय को अतिरिक्त रक्त व ऊतकों की जरूरत नहीं होती । अत: गर्भाशय (uterus) अपनी झिल्ली को छोड़ना आरम्भ कर देता है और रजोधर्म शुरू हो जाता है । इसमें रक्त, श्लेष्मा तथा गर्भाशय की झिल्ली के अंश शामिल होते हैं । यह रक्त योनि (vagina) से प्रवाहित होता है । इसको सेनेटरी पैड या सूती कपड़ों से शोषित करना चाहिए ।

रजोधर्म के समय सावधानियाँ (Precautions during Menstrual Cycle):

ये निम्न प्रकार हैं:

i. प्रतिदिन का दैनिक कार्य सामान्य रूप से करना चाहिए क्योंकि यह एक प्राकृतिक क्रिया है ।

ii. यदि किसी प्रकार की समस्या जैसे कम ऊर्जा महसूस करना, ऐंठन, कमर दर्द, सिर दर्द, पेट दर्द या भूख न लगने की समस्या उत्पन्न होती है तो इन सभी लक्षणों के लिये डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवाई लेनी चाहिए ।

iii. रजोधर्म को देर से करने या उसमें तीव्रता लाने के लिए किसी भी प्रकार की दवाई चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं लेनी चाहिए ।

iv. प्रतिदिन गुनगुने पानी से स्नान करके शरीर के पूरे भागों को स्वच्छ रखना चाहिए । इस समय स्वच्छता की अत्यन्त आवश्यकता होती है । रजोधर्म के समय सेनेटरी नेपकिन का प्रयोग करना चाहिए जिसे 4-6 घंटे बाद बदलना आवश्यक है । यदि सेनेटरी नेपकिन के स्थान पर कपड़ों का प्रयोग किया जाता है तो उसे साबुन और गर्म पानी से अच्छी तरह धोकर धूप में सुखाना चाहिए ।

जननेन्द्रियों की स्वच्छता (Hygiene of Reproductive Organs):

जनर्नोन्द्रेयों की स्वच्छता लड़के व लड़कियों दोनों के लिये आवश्यक है ।

अत: स्वच्छता रखने के लिये निम्न उपाय करना चाहिए:

i. मूत्र विसर्जन के पश्चात् हमेशा जननेन्द्रियों को साफ पानी से धोना चाहिए अन्यथा संक्रमण (infection) हो सकता है ।

ii. अधोवस्त्र हमेशा सूती ही प्रयोग करना चाहिए ।

iii. अधोवस्त्र प्रतिदिन बदलना चाहिए तथा गंदे अधोवस्त्रों को धोकर प्रतिदिन धूप में सुखाना चाहिए ।

iv. यदि अधोवस्त्रों में किसी प्रकार का दाग लगा है तो उसे तुरन्त बदलना चाहिए ।

v. जननेन्द्रियों के आस-पास के बाल साफ करने चाहिए ताकि अधिक पसीना आने से संक्रमण से बचाव हो सके ।

vi. लडकों को भी अपने शिश्न (लिंग) की ऊपरी त्वचा हटा कर प्रतिदिन स्नान करते समय सफाई करनी चाहिए ।

(3) लम्बाई (Height):

(i) लड़के:

किशोरावस्था में लडकों की लम्बाई प्रतिवर्ष 4 इंच बढ़ती है । प्रारम्भिक किशोरावस्था में लड़कों की लम्बाई 55 से 63 इंच तक हो जाती है । इसके पश्चात् इनकी लम्बाई बढ़ कर 65 से 69 इंच हो जाती है । लड़कों की पूर्ण वृद्धि होने के पश्चात् उनकी लम्बाई 69 से 70 इंच तक हो जाती है । औसतन लड़कों की लम्बाई इस काल में 11 इंच बढ़ती है ।

(ii) लड़कियाँ:

लड़कियों की लम्बाई लड़कों की तुलना में दो वर्ष आगे रहती है । लड़कियों में 12 वर्ष की आयु में लम्बाई अत्यन्त तीव्रता से बढ़ती है । इस समय लड़कियाँ 35 इंच प्रतिवर्ष बढ़ती हैं । प्रारम्भिक किशोरावस्था में लड़कियों की लम्बाई 55 से 63 इंच तक बढ़ती है । लड़कियों की लम्बाई पूर्ण वृद्धि के पश्चात् 64.5 इंच तक होती है । औसतन लड़कियाँ किशोरावस्था के वृद्ध में काल में करीब 10 इंच तक बढ़ती हैं ।

(4) भार (Weight):

(i) लड़के:

वृद्धि के इस काल में लड़कों की लम्बाई जिस तीव्रता से बढ़ती है उसी तीव्रता से उनका भार भी बढाता है । यह अवधि 14 वर्ष के आस-पास होती है । प्रारम्भिक किशोरावस्था में लडकों का वजन करीब 73 से 114 पौण्ड होता है ।

उत्तर किशोरावस्था (late adolescence) में लडकों का भार करीब 121 से 149 पौण्ड तक तथा उसके पश्चात् 151 से 161 पौण्ड तक बढ़ता है जो कि करीब 20 पौण्ड प्रति वर्ष होता है । इस काल में लड़के एक वयस्क व्यक्ति के कुल भार का 50 प्रतिशत बढ़ते हैं ।

(ii) लड़कियों:

लड़कियों की लम्बाई पूर्ण होते ही उनका भार अत्यन्त तीव्रता से बढ़ता है । प्रारम्भिक किशोरावस्था में लड़कियों का भार 75 से 114 पौण्ड, इसके पश्चात् उनका भार 118 से 132 पौण्ड तथा अंत में 130 से 134 पौण्ड तक होता है । 12.5 वर्ष की आयु से पूर्ण परिपक्वता तक लड़कियों का भार 18 पौण्ड प्रतिवर्ष बढ़ता है ।

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