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परीक्षा के बाद मैं क्या करूँगा ? Article on My Career Prospects in Hindi Language

परीक्षा के बाद मैं क्या करूँगा ? Article on My Career Prospects in Hindi Language!

आजकल बहुत से पढ़े-लिखे युवक नौकरियों की खोज में इधर-उधर मारे-मारे फिर रहे हैं, क्योंकि सरकारी नौकरियों में कठिन परिश्रम नहीं करना पड़ता और कुरसी मिलती है बैठने को । वहीं नौकरियाँ भी बहुत कम हैं । अब वह समय आ गया है कि शिक्षित लोग अपना ध्यान उस कृषि-कर्म की ओर दें, जिसे वे तुच्छ काम समझते हैं ।

आजकल के पढ़े-लिखे युवक परिश्रम के मूल्य को नहीं जानते हैं । प्रत्येक वह लड़का, जो हाई स्कूल उत्तीर्ण कर लेता है, बड़ी महत्त्वाकांक्षाएं पालने लगता है । कभी सोचता है: मैं थानेदार बनूँगा, तहसीलदार बनूँगा । कभी वह सोचता है: मैं अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में अध्यापक बनूँगा ।

कदाचित् ऐसे सोचनेवालों में से एक-दो की ही इच्छा पूर्ण होती हो, शेष विद्यार्थियों को अपने मनोरथ में असफल रहने के कारण बड़ा कष्ट होता है । परिणाम यह होता है कि बाद में वे लोग कृषि आदि कार्य करने में अपना अपमान समझते हैं और इस तरह नौकरी की खोज में इधर-उधर भटकते रहते हैं ।

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इस कारण मैंने यह निश्चय किया है कि परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मैं नौकरी के चक्कर में न पड़कर वैज्ञानिक पद्धति से कृषि करूँगा । इसके पहले कि मैं कृषि-कार्य प्रारंभ करूँ, मैं कुछ काल के लिए कृषि कॉलेज में प्रशिक्षण लूँगा तथा वहाँ पर मैं कृषि संबंधी सारी नवीन बातों एवं जानकारियों से परिचित होऊँगा और सीखूँगा । भारत एक कृषि-प्रधान देश है ।

यहाँ ९० प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर है; परंतु वे सब पुराने लकीर के फकीर होने के कारण नियमों का प्रयोग करना धर्म के विरुद्ध समझते हैं । वे लोग हड्डियों से बनी खाद का मूल्य नहीं जानते । इसलिए मैंने सफल कृषक बनने के लिए किसी कृषि कॉलेज में पढ़ना निश्चित किया है ।

मैंने योजना बनाई है कि हाई स्कूल परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद एक-दो वर्ष इलाहाबाद अथवा कानपुर के किसी कृषि कॉलेज में प्रशिक्षण प्राप्त करूँगा और उसके बाद अपने गाँव लौटकर अपने खेतों में उन सब बातों को प्रयोग में लाऊँगा ।

इस प्रकार जनता के सम्मुख एक आदर्श उपस्थित करूँगा, साथ ही यदि ग्रामवासी उसे पसंद करें और चाहें कि वे भी नवीन आविष्कारों से लाभ उठाएँ तो मैं उनकी भरपूर मदद करूँगा, अर्थात् अपने समय का कुछ भाग ग्रामवासियों की शिक्षा-दीक्षा के लिए नियत कर दूँगा ।

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जो बातें मैं दो वर्षों में सीखूँगा, उन्हें मैं दो महीने में ही सब किसानों को बता दूँगा । वह कैसा शुभ दिन होगा, जब हमारे कृषक बंधु अपने खेतों से उन्नत फसल उगाकर अधिकाधिक लाभ प्राप्त करेंगे । इतना ही नहीं, नवीन जानकारियाँ प्राप्त करके कृषि में आधुनिक यंत्रों की सहायता से उच्च पैदावार लेकर अन्य किसानों के लिए आदर्श उपस्थित करेंगे ।

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