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“Annual Day Celebration in Our School” in Hindi

विदद्यालय का वार्षिकोत्सव | Article on “Annual Day Celebration in Our School” in Hindi Language!

प्रस्तावना:

बालक का पूर्ण रूपेण सर्वागीण विकास करना ही शिक्षा का उद्देश्य है । बाल्यावस्था में ही उसको उन सभी वस्तुओ का ज्ञान होना चाहिये जिसका उपयोग नित्य-प्रति व्यवहारिक जीवन में होता रहता है । इसलिये विद्यालय में बालक के लिए वे सभी अवसर उपलब्ध कराये जाते हैं जिनका लाभ उठाकर वह पाठ्‌य-पुस्तको के अतिरिक्त व्यवहारिक ज्ञान को प्राप्त करता है ।

विद्यालय में समय-समय पर अनेक प्रकार के खेल-कूद, संगीत, कविता, निबन्ध आदि प्रतियोगिताएँ होती रहती हैं । उसके लिए छात्रों का उत्साह बढ़ाने हेतु पारितोषिक भी प्रदान किये जाते हैं । इसके लिए विद्यालय में कई उत्सव मनाये जाते हैं जिनमे से विद्यालय का वार्षिकोत्सव सबसे अधिक महत्त्व रखता है । यह उत्सव प्रत्येक विद्यालय में वर्ष में एक बार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है ।

वार्षिकोत्सव मनाने का आयोजन व तैयारी:

वार्षिकोत्सव विद्यालय का एक महत्त्वपूर्ण उत्सव है । इसकी प्रतीक्षा प्रत्येक छात्र कई दिनों पूर्व से करता है क्योकि इस अवसर पर प्रत्येक बालक को अपनी कला व प्रतिभा का प्रदर्शन करने का सुअवसर प्राप्त होता है । सबसे पहले प्रधानाचार्य व अध्यापको द्वारा वार्षिकोत्सव के लिए तिथि निश्चित की जाती है । उसके बाद एक कमेटी बनायी जाती है जिसमे कुछ अध्यापक व छात्र होते हैं ।

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यह कमेटी उत्सव की सारी रूप-रेखा बनाकर कई दिन पूर्व से आयोजन की तैयारी मे लग जाती है । इस वर्ष हमारे यहाँ वार्षिकोत्सव के लिए 20 अक्टूबर की तिथि निश्चित की गई थी, जिसकी घोषणा प्रधानाचार्य द्वारा एक माह पूर्व कर दी गयी थी ताकि प्रत्येक खात्र को अपनी तैयारी का पर्याप्त समय मिल सके ।

विद्यालय की वार्षिकोत्सव कमेटी एक माह पूर्व से ही विविध प्रकार के आयोजनो का पूर्वाभ्यास करने लग गयी थी ।

मुख्य अतिथि:

हमारे यहाँ के वार्षिकोत्सव में इस बार दिल्ली प्रशासन के शिक्षा निदेशक महोदय को  मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था । उन्होने उत्सव में शामिल होने की पूर्व स्वीकृति दे दी थी । इसलिए उनके स्वागत की भी तैयारियाँ की गयी । क्षेत्र के अन्य विशिष्ट जनों ने भी उत्सव में पहुँचने की स्वीकृति दे दी थी ।

स्वागत समारोह:

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20 अक्टूबर को प्रात: दस बजे से वार्षिकोत्सव का कार्यक्रम शुरू होना था । हम कई छात्र प्रबन्ध में लगे हुए थे इसलिए हम कार्यक्रम के शुभारम्भ से पूर्व प्रात: आठ बजे विद्यालय में पहुँच गए थे । अन्य छात्रों को 9 बजे विद्यालय में पहुँचना था सभी छात्र निश्चित समय पर विद्यालय में पहुँच गये । धीरे-धीरे अभिभावक व क्षेत्र के विशिष्ट जन विद्यालय में पहुँच रहे थे ।

विद्यालय की स्वागत समिति के सदस्य मुरब्ध प्रवेश द्वार पर आने वाले अतिथियों का स्वागत कर रहे थे । विद्यालय के उपप्रधानाचार्य स्वागत समिति के अध्यक्ष थे । वे विशिष्ट जनो का माल्यार्पण द्वारा स्वागत कर रहे थे ।

एन॰सी॰सी॰ व स्काउट के छात्र अपनी निर्धारित वर्दी में प्रवेश द्वार के दोनों ओर पक्तिबद्ध होकर खड़े थे । ठीक 10 बजे हमारे उत्सव के  मुख्य अतिथि माननीय शिक्षा निदेशक महोदय विद्यालय मे पहुँचे । विद्यालय के मुख्य द्वार पर उनके पहुँचते ही बैण्ड ध्वनि के साथ एन॰सी॰सी॰ व स्काउट के छात्रों ने ताल कदम के साथ उनका स्वागत किया ।

कार्यक्रम का शुभारम्भ:

हमारे मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट गण सभा मच पर पहुँच चुके थे । सभा स्थल के दोनों ओर अध्यापकों व अभिभावकों के लिए कुर्सियाँ लगी थीं । बीच में दरियों पर विद्यालय के छात्रों के बैठने का प्रबन्ध था । सभी लोग अपने-अपने स्थान पर पहुँच गये । छात्र अनुशासन से पक्तिबद्ध होकर बैठ चुके थे । अब यही पर सारे कार्यक्रम प्रस्तुत करने थे ।

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सर्वप्रथम हमारे प्रधानाचार्य महोदय ने विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट पढ़कर सुनायी जिसमें विद्यालय के वर्ष भर के क्रिया-कलापों पर प्रकाश डाला गया और उनकी समीक्षा की गयी । उसके बाद हमारे हिन्दी के अध्यापक ने विभिन्न कार्यक्रमों को प्रस्तुत करने के लिए मंच का सचालन किया । सबसे पहले उन्होंने स्वयं आज के कार्यक्रम व प्रबन्ध पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम की बड़ी सुन्दर भूमिका जमाई ।

फिर एक-एक करके क्रमानुसार छात्रों के कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये, जिनमें छात्रों द्वारा भाषण, कविता, सस्कृत के श्लोक, गीत आदि प्रमुख थे । छात्रों दारा लोक-गीत व लोक-नृत्य का आयोजन किया गया । नाटक व प्रहसनों द्वारा श्रोताओं व दर्शकों का काफी मनोरंजन किया गया । सभी छात्रों ने अपनी-अपनी कला व प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया ।

पुरस्कार वितरण:

उन छात्रों को जिन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किये, उन्हें उसी अनुसार पारितोषिक दिए गए । इसके अलावा जिन-जिन छात्रो ने प्रतियोगिताओं में भाग लिया उन्हें भी उनका उत्साह बढ़ाने के लिए एक-एक पैन उपहार में दिया गया ।

जिन छात्रो ने वार्षिक परीक्षा में अपने- अपने कक्षा या वर्ग में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किए थे, उन्हें भी उसी अनुसार पुरस्कार दिये गए । इस दिन के सारे पुरस्कार मुख्य अतिथि के द्वारा ही वितरित किये गये ।

उपसंहार:

जिस प्रकार घर के त्यौहारो का बहुत बड़ा महत्व होता है, उसी प्रकार विद्यालय के उत्सवों का भी बहुत महत्त्व है, जिनसे छात्रो का बौद्धिक विकास होता है ।

हमें समय-समय पर ऐसे अवसर मिलते रहते है जब हम अपनी योग्यता का प्रदर्शन सार्वजनिक रूप से कर सकते हैं । इसलिए इन उत्सवो में हमें बडी रुचि के साथ भाग लेना चाहिए और इन अवसरों का लाभ उठाना चाहिये । हम अपने विद्यालय के वार्षिकोत्सव को जीवन भर याद रखेगे और उनसे प्रेरणा लेते रहेंगे ।

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