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“Chhattisgarh” in Hindi Language

छत्तीसगढ़ । “Chhattisgarh” in Hindi Language!

1. प्रस्तावना ।

2. प्राकृतिक महत्त्व ।

3. ऐतिहासिक महत्त्व ।

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4. प्रशासनिक संरचना ।

5. छत्तीसगढ़ में परिवहन एवं व्यापार ।

6. छत्तीसगढ़ की सभ्यता एवं संस्कृति ।

7. छत्तीसगढ़ की भाषा ।

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8. छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति ।

(नृत्य, संगीत, चित्र, लोकनाटब, कला)

9. छत्तीसगढ़ की शिक्षा व योजनाएं ।

10. उपसंहार ।

1. प्रस्तावना:

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भारत के हृदय स्थल में स्थित सी-हॉर्स (समुद्री घोड़े की आकृति वाला (धान का कटोरा) कहलाये जाने वाला मेरा प्रदेश छत्तीसगढ़ 1 नवम्बर, 2000 को एक स्वतन्त्र राज्य के रूप में अपने अस्तित्व में आया । भारत के 26वें राज्य के रूप में नवगठित यह राज्य प्राचीनकाल में दक्षिण कोसल, चेदिशगढ़, महाकातार तथा दण्डकारण्य के नाम से भी जाना जाता रहा है ।

इसका नामकरण छत्तीसगढ़ 36 गड़ों के आधार पर किया गया । कहा जाता है कि उस समय ग्रामों का एक बरहा हुआ करता था और 7 बरहों का एक गढ़ होता था । एक ऐतिहासिक निष्कर्ष के अनुसार चेदिशगदूँ छत्तीसगढ़ का ही अपभ्रंश है । मेरा प्रदेश छत्तीसगढ़ प्राकृतिक दृष्टि से ही नहीं ऐतिहासिक, धार्मिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी एक वैभवशाली राज्य है ।

2. प्राकृतिक महत्व:

प्राकृतिक दृष्टि से मेरा प्रदेश छत्तीसगढ़ अत्यन्त वैभवशाली राज्य है । छत्तीसगढ़ राज्य भारत के प्रायद्वीपीय पठार के उत्तर-पूर्वी भाग में विस्तृत है । इसमें बघेलखण्ड का पठार, छत्तीसगढ़ का मैदान एवं दण्डकास्ण्य पठार के भौतिक भाग सम्मिलित हैं ।

बघेलखण्ड एवं पूर्वी पठार के अन्तर्गत छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, सरगुजा, रायपुर, दुर्ग, राजनांद गांव, बस्तर जिले सम्मिलित हैं । छत्तीसगढ़ के मैदानी भाग में कहीं-कहीं पहाड़ियां हैं । शेष भाग विस्तृत मैदानी भू-भाग है । छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संरचना में पहाड़ी प्रदेश, पठारी प्रदेश, सपाट प्रदेश, मैदानी प्रदेश हैं ।

चारों ओर पहाड़ियों से घिरे इस छत्तीसगढ़ पगे मैकल श्रेणी, छुपी की पहाड़ियां, चांगझारवार, देवगढ़ तथा अबूझमाड़ की पहाड़ियां-इन 4 श्रेणियों में बांटा जा सकता है, जो छत्तीसगढ़ राज्य को ‘धान के कटोरे’ के रूप में महिमामण्डित करती हैं ।

यहां की प्रसिद्ध नदियां-महानदी, इन्द्रावती, शिवनाथ, हसदो, सबरी, मांड, रिहन्द, मनियारी, लीलागर, अरपा, तांदुला, खारून, पैरी, जोंक, सुरंगी, बोराई, ईब तथा हांफ हैं । कटिबन्धीय मानसूनी जलवायु है । छत्तीसगढ़ में वर्षा की प्रकृति मानसूनी है । लगभग 90 प्रतिशत वर्षा मानसून अवधि में ही होती है ।

ग्रीष्म, वर्षा, शीत इन मुख्य तीन ऋतुओं द्वारा प्राकृतिक संरचना को प्रभावित करने वाले इस छत्तीसगढ़ राज्य की मिट्टी-जलोढ, भूरी, रेतीली, दोमट, भूरी बलुई, रेतीली तथा वनीय मृदा है । वन सम्पदा की दृष्टि से छत्तीसगढ़ एक सम्पन्न राज्य है । यहां की 44.2 प्रतिशत भूमि वनों से ढकी है ।

वनों के आर्थिक महत्त्व के आधार पर छत्तीसगढ़ शासन ने वनों का राष्ट्रीयकरण कर दिया है । यहां सागौन, साल, बांस तथा मिश्रित वन पाये जाते हैं । वन संरक्षण की दृष्टि से यहां वन्य जीवों के संरक्षण हेतु वन्य प्राणी अभ्यारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान बनाये गये हैं । प्रदेश में 3 राष्ट्रीय उद्यान हैं: 1. इन्द्रावती, 2. संजय और 3. कांगेर घाटी उद्यान ।

ग्यारह वन्य जीव अभ्यारण्यों की दृष्टि से यहां अचानकमार्ग, उदावंती, तमोरपिंगला, सीतानदी, समरसोत, घमेड्, गौमरधा, बारनवापार, बादलखोल, भैरमगढ़, नरसिंहगढ़ हैं । यहां पर बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंसा, चीतल, गौर, बायसन, नीलगाय, भालू सांभर, जंगली सुअर आदि पाये जाते हैं । छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु-वन भैंसा है । राजकीय पक्षी-पहाड़ी मैना है ।

3. ऐतिहासिक महत्व:

छत्तीसगढ़ ऐतिहासिक दृष्टि से एक विशिष्ट भू-भाग रहा है । वैदिककाल से यह आर्यों और अनार्यो का भू-भाग महाकांतार था, जो रामायण युग में दक्षिण कोसल, महाभारत युग में कोसल के नाम से जाना जाता है, जिसकी प्राचीन राजधानी हीरापुर (रतनपुर) थी ।

चित्रांगदपुर, अर्थात् श्रीपुर (सिरपुर) भी इसकी राजधानी रही है । यहां विभिन्न वंशों का शासन रहा है । यथा-मौर्य, सातवाहन, वाकाटक, गुप्त, नल, शरभपुर, पाप सोम, कलचुरी, बस्तर में छिन्दक नागवंशी । कवर्धा में फणिनागवंश रहे है ।

यहां खिलजी तथा मराठा शासन भी रहा है । ब्रिटिश शासन की स्थापना के पश्चात् सन 1856 में अगस्त को सोनाखान जमींदारी से नारायण सिंह ने विद्रोह किया । भीषण अकाल पड़ने पर नारायण सिंह ने साहूकार के गोदाम में पड़ा हुआ माल जनता में बांट दिया था, जिसकी शिकायत लेफिटनेंट स्मिथ तथा डिप्टी कमिश्नर इलियट से की गयी ।

500 सैनिकों को साथ लेकर नारायण सिंह अंग्रेजों से लड़े । 10 दिसम्बर, 1854 को भारतीय स्वाधीनता के सर्वप्रथम क्रान्तिवीर नारायण सिंह को रायपुर जयस्तम्भ चौक में फांसी दे दी गयी ।  राष्ट्रीय चेतना का ऐसा अभुदय हुआ कि यहां की प्रमुख घटनाओं में कंडेल नहर, सत्याग्रह, जंगल सत्याग्रह, झण्डा सत्याग्रह, सविनय आन्दोलन जैसी क्रान्तिकारी घटनाएं हुईं ।

4. प्रशासनिक संरचना:

13, 5, 191 वर्ग कि॰मी॰ क्षेत्रफल वाले दो करोड़, आठ लाख, दस हजार, नौ सौ तैंतालीस जनसंख्या वाले देश के इस 26वें राज्य को तीन सम्भागों (बिलासपुर, रायपुर, बस्तर) में बांटा गया है तथा इसके 18 जिलों में बस्तर, बिलासपुर, दंतेवाडा, दुर्ग, धमतरी, जांजगीर-चांपा, कोरबा, जशपुर, कांकेर, कवर्धा, कोरिया, महासमुंद, रायगढ़, रायपुर, राजनांदगांव, नारायणपुर, बीजापुर हैं । 98 तहसील 146 विकासखण्ड हैं ।

5. छत्तीसगढ़ में परिवहन एवं व्यापार:

छत्तीसगढ़ में परिवहन के चार संसाधनों में-सड़क मार्ग, रेलमार्ग, वायुमार्ग तथा जलमार्ग की सुविधा है । फिर भी दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में इस सुविधा का अभाव है । खनिज संसाधनों की दृष्टि से छत्तीसगढ़ में लगभग 20 विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थ पर आधारित उद्योग हैं, जिनमें लौह अयस्क, बाक्साइट, डोलोमाइट, हीरा आदि प्रमुख हैं ।

यहां की प्रमुख औद्योगिक इकाइयां-भिलाई स्टील प्लाण्ट, बालको, एन॰टी॰पी॰सी॰ सीमेंट फैक्ट्रियां हैं । आय स्त्रोत-धान, वनसम्पदार खनिज सम्पदा हैं । 20 औद्योगिक इकाइयों के साथ-साथ यहां पर्यटन उद्योग की भी काफी सम्भावनाएं हैं ।

6. छत्तीसगढ़ की सभ्यता और संस्कृति:

प्राचीनकाल से ही छत्तीसगढ़ धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक गतिविधियों का केन्द्र रहा है । यहां के लोगों में धर्म के प्रति अटूट आस्था है । यहां हिन्दू-मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्मावलम्बी निवास करते हैं । छत्तीसगढ़ में वैष्णव, शैव, शक्ति, कबीर, सतनाम विभिन्न पंथों के लोग निवास करते हैं ।

कबीर पंथ को अपनाने वाले कबीरपंथी कहलाते हैं, जो आन्तरिक शुद्धता एवं सदाचरण को महत्त्व देते हैं । यहां सतनाम पंथ भी प्रचलित है । इसके प्रवर्तक गुरा घासीदासजी हैं, जिन्होंने मूर्तिपूजा, जातिप्रथा, मांस-मदिरा का विरोध किया ।

छत्तीसगढ़ की सभ्यता में विभिन्न जाति जनजातीय संस्कृतियों का समन्वय मिलता है । इनमें-गोंड, अगरिया, बैगा, मैना, मुईहार, भारिया, भील, पटेलिया, कंवार, उरांव. कोरवा, नगेशिया, खैरवार, पारधी, खरिया, गोंड, परजा, परधान, मुंडा, कोइ हलबा, हलबी मांझी, कोरवा कोडाकू हैं ।

छत्तीसगढ़ लोककला और संस्कृति की दृष्टि से काफी समृद्ध है । यहां लोकसंस्कृति के लोकगीत, लोकनृत्य समाये हुए हैं । यहां आल्हा गायन का खूब प्रचलन है । चौमास में यहां शहरी और ग्रामीण लोग आल्हा गाते सुनाई पड़ते हैं । यहां के लोकगीतों में-पंडवानी, सुख, गोरा, भोजली, ददरिया, पंथी, राऊत नाचा प्रमुख हैं ।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति में जवारा, नेवरात, भोजली प्रमुख रूप से गीतों में रचे-बसे हैं । यहां के त्योहारों में देवारी, दशेरा तीजा, खमरछट, छेरछेरा, हरेली, नवाखाना, राखी, पुन्नी प्रमुख हैं । छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति में तीज और पर्वों की रंग-रंगीली धारा बसी हुई है ।

यहां के लोकप्रिय त्योहारों में तीजा, पोला, हरेली अक्ती प्रसिद्ध हैं । तीजा के त्योहार में सुहागिनें ब्रह्ममुर्हूत में उठकर धार्मिक विधि-विधानों से शिव व पार्वती की पूजा करती हैं । इस दिन वे किसी प्रकार का अन्न, फल, दूध और जल कुछ भी ग्रहण नहीं करतीं, अर्थात् निर्जला व्रत रखती हैं ।

कुंवारी कन्याएं भी श्रेष्ठ वर की कामना से व्रत रखती हैं । छत्तीसगढ़ की यह विशेषता है कि महिला किसी भी अवस्था की हो, मायके वाले उसे लेने आते हैं । पोला के दिन बैलों तथा कृषि औजारों की पूजा होती है । हरेली के दिन नागर की पूजा होती है ।

अक्ती के दिन छत्तीसगढ़ में मिट्टी के बने  गुडु-गुडीयाँ  का विवाह किया जाता है । इस दिन की तिथि को विवाह के लिए शुभ माना गया है । मांगलिक कार्यो का प्रारम्भ इसी दिन से होता है । रहसमण्डली के साथ गम्मत ढोंग का प्रचलन भी है ।

छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोक वाद्यों में मांदर, नगाड़ा, चिकारा, मोहरी, सींग बाजा प्रमुख हैं । छत्तीसगढ़ में चंदैनी और ढोलामारू, भरथरी भी विशेष प्रसिद्ध हैं । करमा गीत, संस्कार गीत, विवाह गीत, होली गीत, डण्डा गीत, लोरी गीत, पंथी गीत, विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों एवं सामाजिक संस्कारों के गीत हैं ।

छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों में तीजनबाई. सूरजबाई खांडे, झाडूराम देवांगन, पूनाराम निषाद, रेखा यादव, प्रभा यादव, शान्ति बाई चलक हैं, तो लोक-नालोक-नादय कलाकारों में हबीब तनवीर, चौवाराम मधुकर कदम विशेष हैं । छत्तीसगढ़ की भाषा-छत्तीसगढ़ की भाषा छत्तीसगढ़की है, जो पूर्वी हिन्दी की उपभाषा है । यह ब्रज की तरह मधुर है ।

यहां की विभिन्न बोलियों में लरिया, सादरी, कुडुक, सरगुजिहा, गौड़ी हल्दी हैं । यहां शिष्ट साहित्य भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिनमें कविता, नाटक, निबन्ध, कहानियां प्रमुख हैं । लोचनप्रसाद पाण्डेय, मुकुटधर पाण्डेय, मुक्तिबोध, बकशीजी, हरि ठाकुर, नारायणलाल परमार, पण्डित सुन्दरलाल शर्मा, श्रीकांत वर्मा यहां के प्रसिद्ध साहित्यकार हैं ।

8. छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति:

रथापत्य कला की दृष्टि से छत्तीसगढ़ का इतिहास बड़ा ही वैभवशाली रहा है । यहां के प्राचीन स्मारक, नक्काशीदार मन्दिर, बौद्ध महल, गुफा, पहाड़ी, पठारों का सौन्दर्य काफी मनमोहक एवं सुन्दर है । प्राचीन मन्दिरों में पंचायतन शैली पर आधारित राजीव लोचन मन्दिर विशेष प्रसिद्ध है । यहां गर्भगृह में भगवान विष्णु की एक चतुर्भुज प्रतिमा है. जिनके हाथों में शंख चक्र, गदा, पदम है ।

1349 ई॰ में फणिनागवंशीयों द्वारा स्थापित चंदेल शैली में वास्तुशिल्प का अद्‌भुत नमूना है । छत्तीसगढ़ में खजुराहो मन्दिर, भोरमदेव का मन्दिर है । यहां के शिव मन्दिर की बाहरी दीवार पर मिथुन प्रतिमाएं, नृत्यरत महिला-पुरुष, गणेश, नटराज, हाथी, घोड़ों की प्रतिमाएं अंकित हैं । बारसूर-इन्द्रावती नदी के तट पर यह ऐतिहासिक, धार्मिक तथा पुरातात्विक स्थल है ।

यहां 32 मन्दिर, मामा-भांजा मन्दिर है । श्रीपुर, शिवरीनारायण, मल्हार, खल्लारी, पाली, तालाग्राम, लुथरा शरीफ, राजिम, रतनपुर प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल हैं । इसके अलावा डीपाडीह का शिव मन्दिर, आरंग का महामाया मन्दिर, रायगढ़ का गुप्तेश्वर मन्दिर, डोंगरगढ़ की मां बग्लेश्वरी, बस्तर की मां दंतेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया प्रसिद्ध हैं ।

छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध गुफाओं, घाट एवं जल प्रपातों में कुटुंबसर गुफा, कोटमसर गुफा, कैलाश गुफा, अरण्य गुफा, दण्डक गुफा तथा केन्दई जल प्रपात, चित्रकूट जल प्रपात, केलकाल घाटी, जशपुर घाट, मैनपाट, मिनीमाता बांगो जलाशय प्रसिद्ध हैं ।

9. शिक्षा व योजनाओं की दृष्टि से छत्तीसगढ़:

छत्तीसगढ़ राज्य में स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के लिए अलग-अलग नीतियां हैं । यहां 6 से 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए अनिवार्य तथा निःशुल्क शिक्षा, पर्यावरणीय शिक्षा, समानता के सिद्धान्त पर आधारित शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध हैं ।

राजीव गांधी शिक्षा मिशन, सर्वशिक्षा अभियान, शिक्षा गारण्टी योजना लागू है । पढ़ने वाले बच्चों को छात्रवृत्ति, मध्याह भोजन, जीवन बीमा की सुविधाएं उपलब्ध हैं । छत्तीसगढ़ के 4 विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के लिए हैं । कुछ निजी, कुछ शासकीय महाविद्यालय इनके अन्तर्गत हैं ।

सन 2001 की जनगणना के अनुसार राज्य की साक्षरता 65.18 प्रतिशत है । इन्दिरा सूचना शक्ति योजनान्तर्गत सरकारी स्कूलों में 9 से 12 वर्ष तक की छात्राओं के लिए कम्प्यूटर शिक्षा की योजना है । योजनाएं नि:सन्देह ही उन्नति के लिए होती हैं ।

छत्तीसगढ़ देश का ऐसा विकासशील राज्य है, जहां विकास का क्रम निरन्तर जारी है । यहां की जनता की खुशहाली एवं सुदृढ़ीकरण हेतु विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं भी है, जिनमें इन्दिरा गांव गंगा योजना, स्वसहायता समूह योजना, महिला सशक्तिकिरण योजना, एकीकृत बाल विकास परियोजना, अन्नपूर्णा योजना, प्रधानमन्त्री रोजगार योजना, ग्राम स्वरोजगार योजना, फसल बीमा योजना, वन योजना प्रमुख हैं । इन्दिरा हरेली सहेली योजना, इन्दिरा खेत गंगा योजना प्रमुख हैं ।

10. उपसंहार:

एक स्वतन्त्र राज्य के रूप में अस्तित्व में आये इस छत्तीसगढ़ के सामने आर्थिक, सामाजिक अनेक चुनौतियां हैं । वहां धार्मिक अन्धविश्वास, कुरीतियों को दूर कर हमें नये स्वतन्त्र समाज का निर्माण करना है तथा नक्सलवाद जैसी समस्याओं से शीघ्र निपटना है । ‘धान का कटोरा’ मेरा छत्तीसगढ़ एक महान राज्य है । मेरा प्यारा प्रदेश है ।

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