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Essay on Consumer Education | Law

Read this essay in Hindi language to learn about consumer education.

प्रत्येक उपभोक्ता के लिये उपभोक्ता शिक्षा अत्यन्त आवश्यक है । उपभोक्ता अपने खून-पसीने की कमाई के द्वारा प्राप्त धन से वस्तुयें खरीदता है । प्रत्येक उपभोक्ता की यह हार्दिक इच्छा होती है कि उसे धन का सही-सही मूल्य प्राप्त हो, तथा वस्तु गुणवत्ता वाली व सही नाप-तौल की हो ।

अत: उपभोक्ता को सही व गलत वस्तुओं का ज्ञान हो तथा विक्रेता द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी की पूरी जानकारी हो । इन सब बातों के लिये उपभोक्ता को उपभोक्ता शिक्षा की आवश्यकता होती है । यदि उपभोक्ता पूर्णरूप से शिक्षित है तो उसे विक्रेता किसी भी प्रकार से गुमराह नहीं कर सकता है ।

उपभोक्ता शिक्षा का अर्थ (Meaning of Consumer Education):

उपभोक्ता शिक्षा का अर्थ है-उपभोक्ताओं को  इस  बात की शिक्षा देना कि क्या, कहाँ, कब, कैसे और कितना खरीदना है एवं जो भी वस्तु खरीदी गई है उसका सही उपयोग ऊइस प्रकार करना है ? मशीनीकरण व आधुनिकीकरण के इस समय में आजकल बाजार में नाना प्रकार की वस्तुयें उपलब्ध हैं ।

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कई बार उपभोक्ता इन अपने लिये चुनाव करना अत्यन्त कठिन हो जाता है । उपभोक्ता ज्ञान के अभाव में सही निर्णय नहीं ले पाता । अत: उपभोक्ता शिक्षा उपभोक्ता को सही व उचित निर्णय लेने में मार्गदर्शन करती है; जैसे:

(1) क्या खरीदें (What to Buy?):

उपभोक्ता को इस बात का स्पष्ट ज्ञान होना चाहिए कि उसे क्या खरीदना है ? अत: उपभोक्ता को उसी वस्तु को खरीदना चाहिये जिसकी आवश्यकता उसे सबसे ज्यादा हो ।

कई बार आवश्यकता न होने पर भी रहिणी बाजार जाकर जो भी चीज उसे सबसे अच्छी लगती है वह बिना सोचे-समझे खरीद लेती है । यह निर्णय गलत है ।

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क्या वस्तु खरीदें इसके लिये निम्न  बातों को ध्यान में रखना चाहिये:

i. खरीददारी से पहले बाजार का अच्छी तरह सर्वेक्षण करना आवश्यक है ताकि उस वस्तु के विषय में पूर्ण जानकारी प्राप्त हो सके ।

ii. जानकारी प्राप्त करने के पश्चात् एक निश्चित ब्रांड का चुनाव करना आवश्यक है । ब्रांड वह हो जिसके नाम से उत्पाद पहचान बाजार में उपलब्ध हो; जैसे: सनड़ाप रिफाइन्ड आयल तथा एम.डी.एच. मसाले ।

iii. वस्तुओं पर मानकीकरण का चिहन अवश्य ही जाँच लें ।

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(2) कब खरीदें (When to Buy)?

i.  खरीददारी तभी करें जब उसकी आवश्यकता हो ।

ii कुछ वस्तुयें मौसम में उपलब्ध होती हैं जैसे-अनाज, दाल आदि । इनको मौसम में खरीदकर संग्रहित कर लेना चाहिये, क्योंकि उस समय उनकी कीमत कम होती है ।

iii.  छूट या सेल में कई बार अच्छी व सस्ती चीजें भी मिल जाती हैं ।

अत: उपभोक्ता को उसका लाभ उठाना चाहिये; जैसे: रेडीमेड या अन्य कपड़े सेल में खरीदें, त्यौहारों पर बिजली के उपकरणों पर छूट मिलती है, उसका लाभ उठाएं । जब दुकानदार या विक्रेता के पास समय हो तभी खरीददारी करें । शनिवार-रविवार को बाजार में अधिक भीड़ होती है, यदि बाजार में भीड अधिक है तो उस समय खरीददारी न करें ।

(3) कितनी खरीदें (How Much to Buy) ?

i. सर्वप्रथम उपभोक्ता को अपने परिवार की आवश्यकता की जानकारी कर लेना चाहिये ।

ii. उतनी ही मात्रा में वस्तु खरीदें जितनी परिवार के लिये जरूरी हो ।

iii. वस्तु की मात्रा परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी निर्भर करती है । अत: वस्तु की मात्रा निश्चित करने से पहले अपने पास की जमा पूँजी का आकलन कर लेना चाहिये ।

iv. वस्तु की मात्रा उसकी प्रकृति पर भी निर्भर करती है । अत: जो वस्तुयें जल्दी खराब होने वाली हों उसे कम मात्रा में खरीदें, परन्तु यदि वस्तु बिकुल खराब न हों तो उसे ज्यादा मात्रा में खरीदनी चाहिए ।

v. कितनी वस्तु खरीदनी है यह परिवार के संग्रहीकरण की क्षमता पर भी निर्भर करता है । यदि घर में स्थान की कमी हो तो वस्तु की कम मात्रा खरीदनी चाहिये ।

(4) कहाँ से खरीदे (From Where to Buy)?

i. यथासम्भव थोक दुकानों या सरकारी स्टोरों से खरीददारी करें ।

ii. कुछ दुकानदारों के पास व्यापार का लाइसेन्स भी होता है । वे सरकारी नियमों का पालन करके व्यापार करते हैं ।

iii. केन्द्रीय भण्डार, सुपर बाजार, बिग बाजार या कम्पनी के शोरूम या कम्पनी द्वारा अधिकृत दुकानों से ही वस्तुयें खरीदना उचित है ।

iv. यदि वस्तु अधिक मात्रा में खरीदनी है तो थोक बाजार पर कम कीमत में वस्तुएँ खरीदनी चाहिये ।

v. वस्तुओं की खरीददारी के उपरान्त विक्रय सेवा (Service) तथा गारण्टी आदि का विशेष ध्यान रखना चाहिये ।

(5) कैसे खरीदें (How to Buy)?

i.  यथासम्भव वस्तुयें नकद ही खरीदनी चाहिये ।

ii. फ्रिज या अन्य बड़े उपकरण खरीदते समय चैक से भुगतान करना अच्छा होता है ।

iii. यदि वस्तुयें उधार खरीदी जाती हैं तो उस वस्तु के वास्तविक मूल्य से कुछ अधिक मूल्य देना पड़ता है । अत: नकद भुगतान करके बचत की जा सकती है ।

iv.  आजकल किस्तों पर भी वस्तुयें खरीदी जा सकती हैं, परन्तु उसके लिये उपभोक्ता को खरीदने से पहले किस्तों के बारे में पूर्ण जानकारी, शर्तें, नियमों आदि के बारे में विस्तारपूर्वक ज्ञान प्राप्त करना अनिवार्य

है । किस्तों पर वस्तु लेने से उपभोक्ता की बचत की राशि बच जायेगी ।

उत्तम होगा कि वस्तुयें किस्तों पर खरीदी जाएँ परन्तु यह पसन्द उपभोक्ता की ही होगी ।

v. खरीददारी के समय विक्रेता से वस्तु को खरीदने की रसीद, गारण्टी व वारण्टी कार्ड विक्रेता से अवश्य ही माँगकर सुरक्षित स्थान पर रखें ।

vi. कोई भी वस्तु कितनी भी कम कीमत की हो परन्तु काला बाजार से न खरीदें ।

(6) किस प्रकार प्रयोग करें (How to Use) ?

i. महँगे उपकरण खरीदते समय उसके उचित प्रयोग के लिये कम्पनी डैमो (Demo)  देती है । उसका उपयोग करना चाहिये ।

ii. वस्तु के प्रयोग से पहले उसके उपयोग के निर्देश को अच्छी तरह पढ़ लेना चाहिये तथा विक्रेता से प्रयोग के बारे में अधिकतम जानकारी लेनी चाहिये ।

iii. यदि प्रयोग में किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो कम्पनी के सर्विस सेन्टर को तुरन्त सूचित करना चाहिये ।

उपभोक्ता शिक्षा के लाभ (Benefits of Consumer Education):

(i) वस्तुओं के विवेकपूर्ण चुनाव भी योग्यता का विकास करने में सहायक होते है ।

(ii) विश्वसनीय, सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता ही उत्पादों के सही मूल्य की माँग करने में सहायक होते हैं ।

(iii) उपभोक्ता शिक्षा में ग्राहक किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी का शिकार नहीं होता तथा वह स्वयं ही कुछ समस्याओं का विवरण कर सकता है ।

(iv) इसके लिये उपभोक्ता को अपने अधिकारों व कर्तव्यों की सही जानकारी होती है ।

(v) अत: उपभोक्ता शिक्षा ग्राहकों को इस बारे में ज्ञान देकर सजग करती है ।

(vi) उपभोक्ता शिक्षा का एक लाभ यह भी है कि सरकार समय-समय पर उपभोक्ता संरक्षण के लिये जो भी नियम बनाती हें उसका ज्ञान होता है ।

(vii) उपभोक्ता को शिक्षा से बाजार की पूर्ण जानकारी प्राप्त होती है; जैसे: एक ही वस्तु की खरीददारी करने के कई साधन हैं ? कौनसा साधन अच्छा व सस्ता है ? कौन-कौन सी दुकानें अधिक सुविधायें देती हैं । किस दुकान पर आधुनिकतम उत्पादित्र वस्तु प्राप्त होती है ? इन सब बातों का ज्ञान प्राप्त करने पर ही वह खरीददारी का निर्णय ले सकता है ?

अत: उपभोक्ता को अच्छा जीवनयापन करने के लिये सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं की आवश्यकता होती है, इसके लिये आधुनिक व नवीन उपकरणों की जरूरत होती है । अत: उपभोक्ता शिक्षा के द्वारा उपभोक्ता अपने धन का उचित उपयोग करके अधिक से अधिक सन्तुष्टि प्राप्त कर सकता है ।

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