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“If I Were the Sports Minister” in Hindi Language

यदि मैं खेल मन्त्री होता । “If I Were the Sports Minister” in Hindi Language!

खेल मानव प्रकृति का अभिन्न अंग है । खेल की महत्ता से सभी अवगत हैं । वह बचपन ही क्या बचपन, जिसने अपने जीवन में कोई खेल नहीं खेला हो । पहले की कहावत: ”पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे तो होगे खराब ।” की सार्थकता न के बराबर रह गयी है । खेल से ही राष्ट्र को गौरव, खिलाड़ी को धन, यश मिलता है ।

इस धन से वह नवाब की तरह रह सकता है । अब खेलोगे कूदोगे, तो होगे नवाब वाली कहावत ज्यादा सटीक बैठती है । मनोरंजन तथा स्वास्थ्य की दृष्टि से जीवन में खेल की महत्ता को देखते हुए मैं सोचता हूं कि व्यक्ति को अपनी-अपनी अवस्थाओं को देखकर खेलों का चुनाव करना चाहिए ।

जहां तक समूचे विश्व में खेलों के अस्तित्व का प्रश्न है, उस दृष्टि से देखा जाये, तो दुनिया में विभिन्न प्रकार के खेल हैं । कुछ इनडोर, कुछ आउटडोर खेल हैं । कुछ खर्चीले, तो कुछ बहुत कम खर्चीले, जिनमें मात्र केवल खिलाड़ियों की आवश्यकता होती है ।

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आज समूचे विश्व में कई प्रकार के खेल हैं, वहीं खेल सम्बन्धी प्रतियोगिताओं की भी कमी नहीं है, जो स्थानीय स्तर से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक खेली जाती हैं । इनमें सम्मान, प्रशस्ति पत्र, मैडल से लेकर बहुत भारी इनामी राशि रखी जाती है । खेलों से इतनी अधिक आमदानी होती है कि व्यक्ति अपने समस्त अभावों को पूरा कर सकता है ।

जहां तक भारत देश की बात है, कुछ खेलों में तो वह सिरमौर है, जिनमें हॉकी, कबड्डी, क्रिकेट आदि शामिल हैं । अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ओलम्पिक जैसे खेलों का सवाल है, हमारा देश भारत ऐसे आयोजनों में पदक तालिका में अपनी जनसंख्या के हिसाब से इतना पीछे है कि ओलम्पिक खेलों में विगत 40 वर्षा से एक भी पदक हासिल करने का गौरव उसे प्राप्त नहीं हुआ है ।

स्वतन्त्रता से पूर्व और कुछ बाद में भारत को हॉकी में ही पदक अर्जित करने का गौरव मिलता रहा । किन्तु लगभग 40 वर्षो से भारत ओलम्पिक खेलों में बेहद शर्मनाक प्रदर्शन करता चला रहा है । चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश होकर भी ओलम्पिक खेलों में एक पदक तो क्या, सेमीफाइनल अथवा फाइनल में पहुंचने तक का सौभाग्य प्रान्त नहीं कर पाया है ।

भारत की तुलना में कई छोटे-छोटे देश तक उपलब्धियां अर्जित कर चुके हैं । ऐसी दशा में यदि मैं खेल मन्त्री होता, तो खेलों को प्राइमरी स्तर से ही अनिवार्य बना देता । दूर-दराज के गांवों तथा जंगलों में बसने वाली जनता में से खिलाड़ी तैयार करवाता । मैं खेल के लिए खिलाड़ियों का चयन करने से पूर्व केवल उनकी योग्यता और प्रतिभा को देखता ।

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किसी प्रभावशाली व्यक्ति की सन्तान को, महज मन्त्री या नेता का पुत्र है, ऐसा समझकर चयनित नहीं करता । एशियाड, ओलम्पिक जैसे खेलों के लिए विशेषतौर पर हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया करवाता । पढ़ाई के साथ-साथ खेल की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए मैं प्रत्येक स्कूल एवं कॉलेजों में खेल प्रशिक्षकों की नियुक्ति कर प्रतिदिन-निर्धारित कालखण्डों में खेलों का प्रशिक्षण दिये जाने की अनिवार्यता को महत्त्व देता ।

ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए खेल प्रतिभा सम्बन्धी विशेष छात्रवृत्ति की योजना लागू करवाता । खेलों के विकास के लिए जितने भी अवसर हों, सभी उपलब्ध करवाता । भारत को अमेरिका, आस्ट्रेलिया, चीन, जापान जैसे देशों की तरह खेल प्रतिभा सम्पन्न राष्ट्र बनाता ।

व्यावहारिक रूप से खेलों के सम्बन्ध में पूर्ण ईमानदारी एवं ठोस संकल्पनात्मक उद्देश्य के साथ अपने खेल मन्त्री सम्बन्धी दायित्व को बखूबी निबाहता । खेलों के क्षेत्र में भारत की आशातीत प्रगति के संकल्प को पूरा किये बिना चैन से नहीं बैठता ।

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