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“Merits and Demerits of Science” in Hindi Language

विज्ञान से लाभ-हानि । “Merits and Demerits of Science” in Hindi Language!

1. भूमिका ।

2. विज्ञान के वरदान या लाभ, विभिन्न क्षेत्रों में ।

3. विज्ञान के अभिशाप ।

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4. उपसंहार ।

1. भूमिका:

आज का युग विज्ञान का युग है । विज्ञान ने इस युग को बड़े-बड़े आविष्कार और खोजें दी हैं, जिसके कारण मनुष्य का जीवन सुविधा से सम्पन्न आरामदेह बन गया है । विज्ञान के बिना एक पल भी जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है ।

2. विज्ञान के वरदान या लाभ:

विज्ञान ने मनुष्य जीवन को ऐसे-ऐसे वरदान दिये हैं, जिससे वह अपनी छोटी-से-छोटी दैनिक आवश्यकता की पूर्ति कर सकता है । विज्ञान ने अन्धे व्यक्ति को आंख, बहरे को श्रवण यन्त्र, विकलांगों के लिए कृत्रिम अंग प्रदान किये हैं । विज्ञान की सहायता से आज का मनुष्य अन्तरिक्ष की यात्रा कर सकता है ।

विज्ञान के वरदान विभिन्न क्षेत्रों में:

कृषि के क्षेत्र में:

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कृषि और उद्योग: धन्धों के विकास में भी विज्ञान ने कृषकों की बड़ी मदद की है । जो किसान पहले कृषि के लिए बैलों पर आश्रित था, वह अपने खेतों को कड़ी धूप में जोतते हुए मेहनत करता नजर आता था । कृषि के क्षेत्र में ट्रेक्टर तो उनके लिए वरदान ही साबित हुआ ।

वहीं सिंचाई के लिए वह वर्षा पर आश्रित न रहकर नलकूप, ट्‌यूबवेल, कुओं, विभिन्न प्रकार के पम्पों की सहायता से सिंचाई का कार्य सरलतापूर्वक कर रहा है । अब वह भाग्यवादी न होकर कर्मवादी बन गया है । ट्रेक्टर, सिंचाई के पम्प, बीज बोने से काटने और साफ करने तक के यन्त्र, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक ओषधियां आदि के कारण उसका उत्पादन कई गुना बढ़ गया है ।

आवागमन के क्षेत्र में: 

आज विज्ञान के द्रुतगति के आवागमन के साधनों ने संसार की दूरी कम कर दी है । साइकिल, रेल, बस, हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर, जलपोत, मोटर, कार गाड़ियां, ट्रक, दुपहिया वाहनों की सहायता से हम बिना किसी कठिनाई के अपने गन्तव्य स्थान की ओर पहुंच सकते हैं । विदेशों की यात्रा भी अब सरल, सुगम व सुखद हो गयी है ।

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चिकित्सा के क्षेत्र में:

 विज्ञान ने चिकित्सा के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व प्रगति कर ली है, जिसमें-एक्स-रे मशीन, अल्ट्रासाउण्ड, सी॰टी॰ स्कैन मशीनें, जो कम्प्यूटर से सीधी जुड़ी होती हैं । एण्डोस्कांपी द्वारा रोगी के शरीर की अन्दरूनी अंगों की खराबी को कम्प्यूटर पर बैठे-बैठे देखकर लेजर किरणों के द्वारा बिना चीर-फाड़ के ठीक किया जा सकता है । आज का मानव इन्टरनेट के जरिये किसी देश के डॉक्टर विशेषज्ञ की सेवाएं ले सकता है ।

शिक्षा के क्षेत्र में: 

आज की शिक्षा केवल क्लीस रूम में ही न रहकर दूरदर्शन, कम्प्यूटर, इन्टरनेट के द्वारा किसी भी गांव या शहर में प्राप्त की जा सकती है ।

मनोरंजन के क्षेत्र में: 

मनोरंजन के क्षेत्र में भी विज्ञान ने सिनेमा, टेलीविजन, रेडियो, वीडियोगेम प्रदान किये हैं, जिसके माध्यम से हम अपना मनोरंजन कर सकते हैं । दूरदर्शन मनोरंजन का एक सशक्त माध्यम है, जिसके द्वारा हम घर पर बैठे-बैठे सभी प्रकार के कार्यक्रम देखकर अपना मनोरंजन कर सकते हैं ।

संचार के क्षेत्र में:

विज्ञान ने संचार के क्षेत्र में तो क्रान्ति ही ला दी है । अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हम एक-दूसरे के नजदीक आ गये हैं, जिसमें उपग्रह, इन्टरनेट, ई मेल, ई कॉमर्स, पेजिंग एवं सेल्युलर, मोबाइल फोन, सेटलाइट फोन, फैक्स, इसी तरह वर्ल्ड नाइड वेव यूजनेट, टेलनेट, पुशनेट, ई टेलीफैक्स, मल्टी मीडिया आदि प्रणालियां विकसित की गयीं ।

उद्योग के क्षेत्र में: 

विज्ञान के कारण आज उद्योग-धन्धों में उत्पादन का पैमाना बढ़ गया है । मशीनों की सहायता से कम लागत पर बड़े पैमाने पर उत्पादन सम्भव हो सका है । इससे समय और श्रम की बचत के साथ उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार आया है । हमारी यहां की हर वस्तु अब विदेशी प्रतियोगिता का सामना कर सकती है ।

प्रिंटिंग व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में: 

आज प्रिंटिंग के क्षेत्र में तरह-तरह की तकनीकें आ गयी है । अखबारों व पुस्तकों की छपायी को आधुनिकता मिली है । फोटोकापी व कम्प्यूटर ने इस काम को गति दी है । इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े कई उपकरण हैं, जिनमें वीडियो कैमरा प्रमुख है । अन्तरिक्ष के क्षेत्र में-अन्तरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में हमारी प्रगति देखकर दूसरे देश में सर्वप्रथम 19 अप्रैल, 1975 को आर्यभट्ट नामक उपग्रह रूसी रॉकेट की मदद से छोड़ा गया ।

इसके अतिरिक्त भास्कर रोहिणी, इन्सेट, ए॰एस॰एल॰ वी, पी॰एस॰एल॰ वी की तथा आई॰आर॰एस॰ संखला के महत्त्वपूर्ण प्रक्षेपण भारत ने सफलतापूर्वक किये । भारत 2005 तक ग्यारह दूरसंवेदी उपग्रह का प्रक्षेपण कर चुका है । इसके एक ओर तो हमें संचार, मौसम आदि क्षेत्रों का लाभ हो रहा है, दूसरी ओर रक्षा क्षेत्रों में हमारे कदम और बढ़ रहे हैं ।

3. विज्ञान के अभिशाप:

विज्ञान ने मनुष्यों को जहां आधुनिक सुख-सुविधाओं से युक्त जीवन दिया है, वहीं उसके जीवन को खतरे में डाल दिया है । विज्ञान के आधुनिकतम विनाशक साधनों में-पिस्तौल, बन्दूकें, स्टेनगन से लेकर हाइड्रोजन बम के परमाणु बम जैसे संहार के साधनों का सृजन किया है, जिससे पलक झपकते ही विश्व को तबाह किया जा सकता है ।

आज हम बारूद के ढेर पर बैठे हुए हिरोशिमा, नागासाकी जैसे विनाशकारी विध्वंस के लिए अपने आपको तैयार कर चुके हैं । एक देश दूसरे देश के साथ युद्ध करने के लिए इन्हीं संहारक साधनों का उपयोग कर रहा है । परमाणु विस्फोट से सूर्य के समान निकलने वाली ऊर्जा, रेडियोधर्मी किरणें मानव के सम्पूर्ण विनाश का कारण बन सकती हैं ।

4. उपसंहार:

हर वस्तु के दो पहलू होते हैं । एक, उसका लाभदायक पक्ष, तो दूसरा, हानिकारक पक्ष । यह तो मनुष्य के विवेक पर निर्भर है कि वह किसे अपनाये । विज्ञान तो मनुष्य का दास है । मनुष्य को उसका दास नहीं बनना चाहिए ।

जो भी हो, विज्ञान ने जहां मानव जीवन को श्रम, शक्ति, समय, धन बचत का उपहार दिया है, वहीं उसके जीवन को चिकित्सा, आवागमन, कृषि, यातायात, संचार, प्रिंटिंग व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, मनोरंजन के क्षेत्र में वरदानस्वरूप सुविधाएं देकर सुखी व सम्पन्न बनाया है । विज्ञान के चमत्कार मनुष्य के लिए वरदान ही हैं ।

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