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“Nuclear Tests and India” in Hindi Language

भारत में परमाणु परीक्षण का औचित्य । “Nuclear Tests and India” in Hindi Language!

1. प्रस्तावना ।

2. भारत में परमाणु परीक्षण ।

3. परमाणु परीक्षण पर भारत का दृष्टिकोण ।

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4. परमाणु परीक्षण से होने वाले प्रभाव ।

5. उपसंहार ।


1. प्रस्तावना:

वर्तमान युग परमाणु युग है । भारत भी परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों में एक है । परमाणु शक्ति का सबसे पहले प्रयोग जापान के दो नगरों-हीरोशिमा और नागासाकी पर 6 तथा 9 अगस्त, 1945 को अमेरिका द्वारा किया गया ।

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इन बमों की संहार शक्ति को देखकर सारा विश्व कांप कर रह गया । परमाणु को अंग्रेजी में ”एटम” कहते हैं । यह किसी तत्त्व का ऐसा भाग है, जिसके टुकड़े नहीं हो सकते । विभाजनर्राहेत बम में यूरेनियम और थोरियम के परमाणु होते हैं ।

इन बमों की संहारक क्षमता को देखकर सभी उन्नत देशों ने अपने प्रभाव व दबदबे को कायम रखने के लिए इसका सृजन करना शुरू किया । आज अमेरिका, रूस, चीन, जापान, फ्रांस, भारत, द॰ कोरिया तथा पाकिस्तान जैसे परमाणु शक्तिसम्पन्न देश हैं ।

यद्यपि नि:शस्त्रीकरण की नीति के तहत इस पर प्रतिबन्ध लगाने के प्रयास जारी हैं, तथापि प्रतिबन्ध की वकालत करने वाली महाशक्ति अमेरिका ही इसका प्रयोग अधिक करते हुए विश्व पर अपनी दादागिरी जमा रही है ।

2. भारत में परमाणु परीक्षण:

भारत भी अपनी सुरक्षात्मक नीति के तहत परमाणु शक्ति सम्पन्न देश बनना चाहता है । शान्तिप्रिय, अहिंसावादी यह देश तब तक इसका प्रयोग नहीं करना चाहेगा, जब तक उसे अत्याधिक विवश न किया जाये । जापान में परमाणु बमों की मारक क्षमता को देखकर परतन्त्र भारत में सन् 1945 में ”टाटा इंस्टीट्‌यूट ऑफ फण्डामेण्टल रिसर्च” की स्थापना करके परमाणु कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया ।

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स्वतन्त्र भारत में 1948 में परमाणु आयोग की स्थापना डॉ॰ होमी जहांगीर भाभा की अध्यक्षता में की गयी । इसके अन्तर्गत मुम्बई के समीप ट्राम्बे में परमाणु शक्ति केन्द्र स्थापित किया गया । यहीं पर सन् 1955 में परमाणु रियेक्टर भी निर्मित किया गया, जिसका प्रयोग विद्युत् उत्पादन तथा सुरक्षा एवं शान्ति के लिए किया गया ।

भारत में तारापुर, कोटा, कलपक्कम, नरौरा, ककरपारा, कंगार, रावतभाटा आदि में परमाणु ऊर्जा से संचालित बिजलीघर बनाये गये । भारत में प्रथम परमाणु विस्पगेट 18 मई, 1974 को प्रात: 8 बजकर 5 मिनट पर राजस्थान के पोखरन में भूमि के 100 मीटर नीचे किया गया । इस ऐतिहासिक क्षण में भारत जहां अणुशक्ति सम्पन्न बना, वहीं रूस, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन जैसे देश भौंचक्के रह गये थे ।

इसके बाद उसी क्षेत्र में लगभग 24 वर्षो बाद सन् 1998 में 11 मई को अपराह तीन बजकर पैंतालीस मिनट पर भारत वैज्ञानिकों ने अपनी क्षमता का पुन: प्रदर्शन परमाणु बमों का विस्फोट कर किया, जिसकी भूकम्पीय तीव्रता 54 अनुमानित मापी गयी, जिसकी कुल क्षमता 45 किलो टन थी ।

परमाणु सम्पन्न राष्ट्रों ने भारत की इस उपलब्धि की यह कहकर आलोचना की कि इसकी विस्फोटक क्षमता 58 किलो टन नहीं, 16 किलो टन होगी । जो भी हो, भारत की यह परमाणु विस्फोट क्षमता विश्व के शक्तिशाली देशों की तुलना में कम तो नहीं थी । यह तो उनका खौफ बोल रहा था ।

आगे भारत हाइड्रोजन बम का ताप नाभिकीय प्रणाली के द्वारा परीक्षण करने का जल्द ही मन बना चुका था । इस बम प्रणाली को 200 मीटर गहरे कुएं में उतारा गया, ताकि वहां से 5 कि॰मी॰ दूर बसे गांव को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे । 11 मई, 1998 को तीन प्रणालियों का विस्फोट किया गया ।

3. परमाणु परीक्षण पर भारत का दृष्टिकोण:

इस प्रकार परमाणु परीक्षण करके भारत ने यह सिद्ध किया कि वह बड़े राष्ट्रों की धमकियों के आगे सिर झुकाने वाला नहीं है । रेडियोधर्मी घातक किरणों पर नियन्त्रण रखते हुए इन नियन्त्रित विस्फोटों ने भारत के सफल परमाणु कार्यक्रम को सिद्ध कर दिया ।

तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार तथा विपक्ष ने भी भारत के इस परमाणु कार्यक्रम की सराहना की । अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय में भारत द्वारा किये गये परमाणु परीक्षणों की कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए अमेरिका, कनाडा, जापान, जर्मनी ने भारत पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबन्ध लगाये, किन्तु रूस, फ्रांस, ब्रिटेन ने प्रतिबन्ध लगाने से इनकार कर दिया ।

भारत ने इन आर्थिक तथा सैन्य मदद दिये जाने वाले प्रतिबन्धों के लगाये जाने पर इससे भयभीत हुए बिना अपनी निडरता का परिचय दिया । विश्व बैंक तथा, अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष पर भी अमेरिका ने भारत पर प्रतिबन्ध लगाने हेतु दबाव बनाया ।

भारत ने अपनी विदेश नीति के तहत जिनेवा में परमाणु परीक्षण के रोक की प्रस्तावित परिसीमन सन्धि {सी॰टी॰बी॰टी॰} पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया । अपनी वैदेशिक कड़ी नीति का परिचय देकर अमेरिका सहित परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्रों को यह बता दिया कि भारत किसी के सामने झुकेगा नहीं ।

वह तो अपनी जनता की इच्छानुसार परमाणु परीक्षण करेगा । यदि भारत सी॰टी॰बी॰टी॰ पर हस्ताक्षर कर देता, तो भारत को उत्तरी सीमा पर बसे चीन तथा पाकिस्तान जैसे घोर शत्रु से सुरक्षा का भयंकर खतरा

था । इधर सी॰टी॰बी॰टी॰ पर भारत को हस्ताक्षर करवाकर अमेरिका अपनी मनमानी करना चाहता था ।

वास्तविकता यह है कि विश्व के परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र सी॰टी॰बी॰टी॰ के प्रति स्वयं ईमानदार नहीं हैं । भारत ने उनके समक्ष यह तर्क दिया कि: 1.इस सन्धि के पश्चात् कोई भी परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र परमाणु परीक्षण नहीं करे ।

2. परमाणु सम्पन्न देश 10 वर्षो के भीतर अपने परमाणु हथियारों को नष्ट कर दे । यदि यह अवधि कम लगे, तो उसे बढ़ा दे ।

3. मात्र परमाणु विस्फोट पर प्रतिबन्ध न लगे, वरन् प्रयोगशालाओं में भी परीक्षण पर रोक लगे ।

4. भारत अपनी सुरक्षा की अनदेखी नहीं कर सकता; क्योंकि उसके पडोसी देश चीन और पाकिस्तान के पास भी परमाणु हथियार हैं । इस सन्धि को स्वीकार कर भारत परमाणु हथियारों के क्षेत्र में अलग पड़ जायेगा और इस सन्धि के प्रति परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्रों की ईमानदारी पर उसे सन्देह है ।

21वीं सदी में भारत परमाणु सम्बन्धी सिद्धान्त पर तृतीय विश्व का प्रतिनिधित्व कर सकता है । यद्यपि सी॰टी॰बी॰टी॰ का कार्यक्रम मानव जाति के लिए हितकर है, तथापि भारत जैसा शान्तिप्रिय देश किसी अन्य देश के लिए खतरा नहीं बन सकता है ।

4. परमाणु परीक्षण से होने वाले प्रभाव:

परमाणु विस्फोट करने से जो रेडियोधर्मी किरणों का विकिरण होता है, उससे समस्त मानव जाति के विनष्ट होने का खतरा है । परमाणु शक्ति के गलत प्रयोग से ही जापान के हीरोशिमा और नागासाकी पुर इतना घातक प्रभाव हुआ कि लाखों की जनसंख्या अपंग हो गयी ।

आने वाली पीढ़ियां, जो गर्भावस्था में थीं वह भी विकृति के रूप में सामने आयीं । इससे ब्रेन ट्‌यूमर, ज्यूकेमिया जैसी बीमारियां होने से लाखों, करोड़ों की मृत्यु हो जाती है । पर्यावरण बुरी तरह से प्रभावित होता है । मौतों के कारण मनोबल गिर जाता है ।

परमाणु ऊर्जा का लाभप्रद पक्ष यह है कि इससे बहुत कम ईधन में बिजली का निर्माण होता है । । इसका उपयोग उद्योग व चिकित्सा क्षेत्र में कैंसर, ट्‌यूमर आदि में किया जाता है । इतिहासकारों को परमाणु विज्ञान के द्वारा स्मारकों, अवशेषों तथा-पृथ्वी की आयु का ज्ञान होता है । किसी रेल लाइन, सड़क के बीच बड़े पहाड़ या टीले को परमाणु विस्फोट के माध्यम से उड़ाकर समतल बनाया जाता है ।

सुरंगें तथा खदान निर्माण, प्राकृतिक तेल और गैस के कुओं का निर्माण होता है । परमाणु ऊर्जा से विमान, रेलगाड़ी, पनडुब्बियां आदि तीव्र गति से चलायी जा सकती हैं । अन्तरिक्ष यानों की उड़ानों, उपग्रहों के लिए भी इसका प्रयोग होता है । जब कोयला और पेट्रोलियम जैसे प्राकृतिक संसाधन खत्म हो जायेंगे, तब परमाणु ऊर्जा का प्रयोग किया जा सकेगा ।

5. उपसंहार:

परमाणु परीक्षण का औचित्य भारत के लिए पड़ोसी शत्रु राष्ट्र चीन और पाकिस्तान से सुरक्षा के लिए तथा विश्व में अपनी धाक जमाये रखने के लिए जरूरी है । शान्तिपूर्ण प्रयोग विकास कार्यो में इसका उपयोग किया जाता है । वैसे भारत में यूरेनियम-थोरियम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं ।

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