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4 Main Spheres of the Earth | Geography

Read this article in Hindi to learn about the four main spheres of the earth. The spheres are: 1. The Atmosphere 2. Hydrosphere 3. Lithosphere 4. Biosphere.

मानवजाति जिन संसाधनों पर निर्भर है वे विभिन्न स्रोतों या क्षेत्रोंसे आते हैं ।

Sphere # 1. वायुमंडल (The Atmosphere):

i. मनुष्य के साँस लेने के लिए आक्सीजन (चयापचयी आवश्यकताएँ),

ii. वन्यप्राणी समूह तथा मनुष्य द्वारा भोजन के रूप में प्रयुक्त पालतू पशुओं के लिए आक्सीजन,

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iii. पौधों की वृद्धि में प्रयुक्त कार्बन डाइआक्साइड के रूप में आक्सीजन (जिनका उपयोग फिर मानव करता है) ।

वायुमंडल पृथ्वी के लिए एक रक्षाकवच का काम करता है । सबसे नीचे का स्तर अर्थात क्षोभमंडल (troposphere) जो केवल 12 किमी मोटा है, और पर्याप्त रूप से इतना गर्म है जिसमें हम जीवित रह सकते हैं । समतापमंडल (stratosphere) 50 किलोमीटर मोटा है और इसमें सल्फेट की एक सतह होती है जो वर्षा कराने के लिए आवश्यक होती है ।

इसमें ओजोन की एक तह भी होती है जो पराबैंगनी किरणों को, जो कैंसरजनक होती हैं, रोकती है । ओजोन पर्त के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है । वायुमंडल सूर्य के ताप से एक समान गर्म नहीं होता जिसके कारण वायु का प्रवाह होता है तथा पृथ्वी के विभिन्न भागों में जलवायु, तापमान और वर्षा संबंधी अंतर पैदा होते हैं । यह एक पेचीदा गतिशील व्यवस्था है जिसके भंग होने पर पूरी मानवजाति प्रभावित होगी । वायु के अनेक प्रदूषकों के विश्वव्यापी और क्षेत्रीय, दोनों प्रभाव होते हैं ।

जीवित प्राणी वायु के बिना कुछ पलों तक भी जीवित नहीं रह सकते । जीवित रहने के लिए स्वच्छ वायु चाहिए । अनेक वायुप्रदूषक उन औद्यौगिक इकाइयों से पैदा होते हैं जो वायु में कार्बन डाइआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड और विषैला धुँआ छोड़ते हैं । वायु जीवाश्म ईंधन जलाने से भी प्रदूषित होती है ।

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वायुमंडल में कार्बन डाइआक्साइड का जमाव, जिसे हम ‘हरितगृह प्रभाव’ (green house effect) भी कहते हैं, आज की विश्वव्यापी उष्णता (global warming) का कारण है । जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल और डीजल) पर चलने वाली स्कूटरों, मोटरसाइकिलों, कारों, बसों और ट्रकों की बढ़ती संख्या नगरों में और राजमार्गों पर वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है ।

वायु प्रदूषण मानव के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालता है । यह भयानक और असाध्य श्वास रोगों को जन्म देता है, जैसे फेफड़े के विभिन्न रोग, दमा, यहाँ तक कि कैंसर को भी ।

Sphere # 2. जलमंडल (Hydrosphere):

i. साफ पानी पीने के लिए (तमाम जीवन-प्रक्रियाओं के लिए चयापचयी आवश्यकता),

ii. धोने और खाना पकाने के लिए पानी,

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iii. कृषि और उद्योग में प्रयुक्त होने वाला पानी,

iv. मछलियों, झींगों तथा समुद्री घास आदि से प्राप्त खाद्य संसाधन,

v. मछलियों, झींगों और जलीय पौधों समेत ताजे जल से प्राप्त संसाधन,

vi. पर्वत शृंखलाओं से नीचे आता हुआ पानी जिसका उपयोग जलविद्युत परियोजनाओं में बिजली पैदा करने के लिए किया जाता है ।

जलमंडल पृथ्वी के तीन-चौथाई भाग पर फैला हुआ है । समुद्री पारितंत्र जलमंडल का एक बड़ा भाग है, जबकि ताजा जल इसका एक मामूली भाग ही है । नदियों, झीलों और हिमालयों के ताजे जल का नवीनीकरण वाष्पीकरण और वर्षा द्वारा होता रहता है; इसमें से कुछ जल भूमिगत जलाशयों में जमा होता रहता है । वनविनाश जैसे मानवीय कार्यकलाप जलमंडल में गंभीर परिवर्तन लाते हैं । भूमि जब वनस्पति के आवरण से खाली हो जाती है तो वर्षा मिट्‌टी को काटती है जो बहकर समुद्र में चली जाती है ।

उद्योगों से रसायन और गंदा जल नदियों में और फिर सागर में पहुँचता रहना है । इस तरह जल प्रदूषण प्राणी समुदायों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करता है क्योंकि हमारा जीवन साफ पानी की उपलब्धता पर निर्भर है । कभी का यह प्रचुर संसाधन प्रदूषण के कारण अब दुर्लभ और महँगा होता जा रहा है ।

Sphere # 3. स्थलमंडल (Lithosphere) :

i. मिट्‌टी (मृदा) जो हमें भोजन देने वाली कृषि का आधार है,

ii. पत्थर, रेत और कंकड़-पत्थर, निर्माण कार्यों में प्रयुक्त,

iii. मृदा के सूक्ष्म पोषकतत्त्व, पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक,

iv. सूक्ष्मप्राणी, मिट्‌टी के छोटे जीव और फफूँद, स्थलमंडल की महत्त्वपूर्ण जीवित कायाएँ जो पौधों के कचरों और प्राणियों के मल को विघटित करके पौधों को पोषकतत्त्व प्रदान करती हैं,

v. बड़ी संख्या में वे खनिज पदार्थ जिन पर हमारे उद्योग आधारित हैं,

vi. भूमिगत स्रोतों से प्राप्त तेल, कोयला और गैस । ये वाहनों, खेती की मशीनों, उद्योगों और हमारे घरों को ऊर्जा प्रदान करती हैं ।

स्थलमंडल का आरंभ पदार्थ के एक गर्म गोले के रूप में हुआ जिससे कोई 4.6 अरब साल पहले पृथ्वी बनी । लगभग 3.2 अरब वर्ष पहले तक पृथ्वी काफी ठंडी हो चुकी थी और तब एक बहुत विशेष घटना घटी-हमारे ग्रह पर जीवन का आरंभ हुआ । पृथ्वी की पपड़ी (पर्पटी) छह-सात किमी मोटी है और महाद्वीपों के नीचे है । स्थलमंडल के 92 तत्त्वों में केवल आठ ही भूतल पर स्थित चट्‌टानों के आम घटक हैं ।

इन घटकों में 47 प्रतिशत आक्सीजन, 28 प्रतिशत सिलिकन, आठ प्रतिशत एल्युमिनियम और पाँच प्रतिशत लोहा है जबकि सोडियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम और कैल्शियम चार-चार प्रतिशत हैं । ये तत्त्व मिलकर कोई दो सौ आम खनिज यौगिकों का निर्माण करते हैं । चट्‌टानें टूटकर मिट्‌टी बनती है जिस पर मानव खेती के लिए निर्भर है । उनके खनिज भी विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चे माल होते हैं ।

Sphere # 4. जैवमंडल (Biosphere):

i. फसलों और पालतू पशुओं से प्राप्त भोजन, जो मानव की चयापचयी (metabolic) आवश्यकताएँ पूरी करते हैं,

ii. भोजन जीवन के उन सभी रूपों के लिए जो समुदाय में परस्पर निर्भर प्रजातियों के रूप में रहते हैं, और प्रकृति में वे खाद्य-शृंखलाएँ बनाते हैं जिन पर मानव निर्भर है,

iii. ऊर्जा की आवश्यकताएँ: जंगलों और बागान से प्राप्त जैवभार (biomass) और ईंधन की लकड़ी, साथ में अन्य रूपों में तथा ऊर्जा के रूप में प्रयुक्त कार्बनिक पदार्थ,

iv. इमारती लकड़ी और निर्माण की दूसरी सामग्रियाँ ।

जैवमंडल पृथ्वी की अपेक्षाकृत पतली तह है जिस पर जीवन संभव है । इसके अंदर वायु, जल, चट्‌टानें, मिट्‌टी और जीवित प्राणी पारिस्थितिकी (ecology) की वे ढाँचागत (structural) और प्रकार्यात्मक (functional) इकाइयाँ हैं जिनको कुल मिलाकर एक विशाल विश्वव्यापी जीवन व्यवस्था, हमारी पृथ्वी की जीवन व्यवस्था माना जा सकता है । इस ढाँचे के अंदर, मोटे तौर पर समान भूगोल और जलवायु तथा पौधों और जीवों के समुदायों वाले क्षेत्रों को हम अपनी सुविधा के लिए विभिन्न जैव-भौगोलिक क्षेत्रों (biogeographical realms) में बाँट सकते हैं ।

ये विभिन्न महाद्वीपों में पाए जाते हैं । इनमें भी और छोटी जैव-भौगोलिक क्षेत्रों को ढाँचागत भिन्नता और प्रकार्यात्मक दृष्टिकोण के आधार पर सुस्पष्ट और पहचान योग्य पारितंत्रों में वर्गीकृत किया जा सकता है जो किसी भूदृश्य या जलदृश्य को एक विशिष्ट चरित्र प्रदान करते हैं । उनकी देखने और पहचान में आसान विशेषताओं का वर्णन विभिन्न स्तरों पर किया जा सकता है, जैसे देश, राज्य या जिला के स्तर पर, यहाँ तक कि वादी, पर्वतमाला, नदी या झील के स्तर पर भी ।

इन पारितंत्रों में सबसे आसान तालाब को समझना है । उसका प्रयोग किसी भी दूसरे पारितंत्र को समझने और किसी पारितंत्र में कालक्रम में होने वाले परिवर्तनों को समझने के लिए मॉडल के तौर पर किया जा सकता है । तालाब की ढाँचागत विशेषताएँ उसकी लंबाई, गहराई और उसके पानी की गुणवत्ता हैं ।

तालाब का किनारा, छिछला भाग और गहरा भाग, सभी पौधों और जीवों के विभिन्न समुदायों के लिए विशेष दशाएँ प्रदान करते हैं । प्रकार्यात्मक दृष्टि से (functionally) अनेक प्रकार के चक्र तालाब की ‘प्रकृति’ को प्रमाणित करते हैं, जैसे वर्ष के विभिन्न काल में तालाब में पानी की मात्रा, इर्दगिर्द के स्थलीय पारितंत्र से बहकर तालाब में आनेवाले पोषक तत्त्वों की मात्रा, आदि ।

मंडलों के बीच विभिन्न चक्र (Natural Cycles between the Spheres) :

ये चारों मंडल घनिष्ठ संबंधों में बँधी प्रणालियाँ हैं और एक-दूसरे की अखंडता के लिए परस्पर निर्भर हैं । हमारे पर्यावरण के किसी एक मंडल में विघ्न पड़ने पर दूसरे सभी मंडल प्रभावित होते हैं ।

उनके बीच संबंध मुख्यतः चक्रों के रूप में होता है । उदाहरण के तौर पर वायुमंडल, जलमंडल और स्थलमंडल सभी जल-चक्र के द्वारा आपस में संबंधित हैं । जलमंडल (समुद्री और ताजे जल के पारितंत्रों) से वाष्प बनने वाला जल वायुमंडल में जाकर बादल बनता है । यह बादल संघनित होकर वर्षा के रूप में गिरता है जिससे स्थलमंडल को नमी मिलती है जिस पर जीवन निर्भर है । वर्षा चट्‌टानों के अपरदन (कटाव) का कारण भी है और लाखों वर्षों में इसने वह मिट्‌टी पैदा की है जिस पर पौधों की वृद्धि होती है ।

पवन रूप में वायुमंडल की गतिविधियाँ भी चट्‌टानों को तोड़कर मिट्‌टी बनाती हैं । सबसे संवेदनशील और जटिल संबंध एक ओर वायुमंडल, जलमंडल और स्थलमंडल तथा दूसरी ओर जैवमंडल में रहने वाले लाखों प्राणियों के बीच के संबंध होते हैं । पृथ्वी पर रहने वाले तमाम प्राणी स्थलमंडल और जलमंडल की उसी अपेक्षाकृत पतली तह में रहते हैं जो भूमि और जल की सतह पर पाई जाती है । वे जिस जैवमंडल का निर्माण करते हैं उसके तीन अन्य ‘मंडलों’ के विभिन्न भागों के साथ अनगिनत संबंध होते हैं ।

इसलिए इन अलग-अलग इकाइयों-मिट्‌टी, जल, वायु और जीवित प्राणियों-के अंतःसंबंधों को समझना तथा पारितंत्रों को उनकी समग्रता में सुरक्षित रखने के महत्त्व को जानना आवश्यक है ।

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