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Hardness of Water: Harms and Remedies |Hindi

Read this article in Hindi language to learn about the harms caused by hardness of water along with its remedies.

कठोर जल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है ।

ये हानियाँ निम्न प्रकार हैं:

1. पाचन क्रिया पर बुरा प्रभाव पड़ता है तथा भोजन का पाचन ठीक प्रकार से नहीं हो पाता ।

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2. स्वाद अच्छा न होने से तृप्ति नहीं होती ।

3. भोजन में उपस्थित वसा के इमल्सीकरण की क्रिया कठोर जल की उपस्थिति के कारण ठीक प्रकार नहीं हो पाती है । अत: वसा का पाचन नहीं हो पाता ।

4. कठोर जल में कपड़े धोने से साबुन अधिक लगता है ।

5. कठोर जल को बर्तन में उबालने व रखने से खनिज लवण बर्तन की तली में जमा हो जाते हैं ।

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6. बॉयलर में कठोर जल प्रयोग करने से वे खराब हो जाते हैं ।

7. कठोर जल का उबलने का तापक्रम 1000C से कम होता है । अत: इस स्थिति में पानी उबालने से भोजन ठीक प्रकार से पक नहीं पाता ।

8. सिंचाई के लिए भी कठोर जल अनुपयोगी होता है ।

जल की कठोरता दूर करने के उपाय (Remedies to Remove Hardness of Water):

जल में पाई जाने वाली कठोरता दो प्रकार की होती है:

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(1) अस्थायी कठोरता,

(2) स्थायी कठोरता ।

(1) अस्थायी कठोरता दूर करने के उपाय:

इसके लिए निम्न उपाय किये जाते हैं:

जल को उबालना-जल को उबालकर उसमें घुलित खनिज लवणों को अपघटित कर लिया जाता है । ये पदार्थ जल में अघुलनशील हो जाते हैं तथा इनका अवक्षेपण हो जाता है । इन अवक्षेपों को फिल्टर पेपर से छानकर अलग कर दिया जाता है । इस प्रकार छना हुआ जल कठोरता मुक्त अर्थात् मृदु जल के रूप में पाया जाता है ।

चूना मिलाना:

जल की अस्थायी कठोरता दूर करने के लिए कठोर जल में एक निश्चित मात्रा में चूना मिलाया जाता है । जल में उपस्थित कैल्सियम तथा मैग्नीशियम के बाइ-कार्बोनेट चूने के साथ रासायनिक क्रिया करके कैल्सियम कार्बोनेट तथा मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड बना लेते हैं । ये पदार्थ जल में अघुलित होते हैं । इन्हें छानकर अलग किया जा सकता है । इस प्रकार मृदु जल प्राप्त होता है ।

(2) स्थायी कठोरता दूर करने के उपाय:

जल की स्थायी कठोरता दूर करने के उपाय निम्नलिखित हैं:

कपड़े धोने के सोडे द्वारा:

स्थायी कठोर जल में कपड़े धोने का सोडा अर्थात् सोडियम कार्बोनेट मिलाने से सारे लवण अवक्षेपित हो जाते हैं । इन्हें छानकर अलग किया जाता है तथा बचा जल मृदु हो जाता है ।

सोडा तथा चूने के द्वारा:

इस विधि में सोडे व चूने का मिश्रण जल में मिलाया जाता है । लवण का अवक्षेपण होने के बाद उसे छान लिया जाता है तथा बचा हुआ जल मृदु जल होता है ।

परम्यूटिट विधि:

इसे जियोलाइट भी कहते हैं, परन्तु इस लवण का व्यापारिक नाम सोडियम एल्युमिनियम सिलिकेट है ।

इस उपकरण में अग्र भाग होते है:

1. एक बड़ा आयताकार स्टील कण्टेनर ।

2. कण्टेनर के एक ओर पाइप होता है जिसका सम्बन्ध पानी की टंकी से होता है ।

3. कण्टेनर में बजरी, मोटी रेत, जियोलाइट की पर्त तथा महीन बालू भरी रहती है ।

4. कठोर जल इनके ऊपर से प्रवाहित होता है तथा मृदु होता जाता है ।

5. कण्टेनर के निचले भाग में लगे पाइप द्वारा मृदु जल प्राप्त किया जाता है ।

6. जियोलाइट की क्षमता कम होने पर उसको बदलवाते रहना चाहिए ।

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