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Meal Planning of a Family | Home Science

Read this article in Hindi language to learn about the importance of meal planning of a family.

अर्थ:

आहार आयोजन करने का कोई एक विशेष सूत्र नहीं है । कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया भोजन हर व्यक्ति के लिए आनन्दायक होता है, चाहे उसका सेवन घर में किया गया हो या बाहर । आहार आयोजन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा प्रतिदिन खाए जाने वाले आहार का निर्णय होता है ।

अत: आहार आयोजन एक कला है । जिसमें एक गृहिणी के प्रतिदिन के कार्यों के साथ-साथ परिवार के लिए आहार आयोजित करना भी एक महत्वपूर्ण कार्य है । आहार आयोजन में कला एवं विज्ञान दोनों के सिद्धान्तों का समावेश रहता है ।

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महत्व:

i. समस्त परिवार का सुख व स्वास्थ्य गृहिणी के आहार आयोजन पर निर्भर करता है ।

ii. रुचिपूर्वक तैयार किया गया भोजन हमें सन्तोष, तृप्ति तथा जीवन के समस्त सुख व मनोविनोद की प्राप्ति कराता है ।

iii. शरीर की रोगों से रक्षा तथा सुरक्षा प्रदान करता है ।

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iv. सम्बन्धियों एवं मित्रों से सुख व शान्तिपूर्ण सम्बन्ध स्थापित रखने में सहायक होता है ।

v. अनेक पर्वों, समारोहों, त्योहारों पर नाना प्रकार के व्यंजन बनाये जाते हैं ।

vi. आहार आयोजन करने से श्रम, समय व ऊर्जा की बचत होती है ।

आहार आयोजन के सिद्धान्त (Principles of Meal Planning):

आहार आयोजन के प्रमुख सिद्धान्त निम्न प्रकार हैं:

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i. पूरे (whole) दिन को एक इकाई के रूप में लें; उदाहरणार्थ: सुबह का नाश्ता, दोपहर का खाना व रात्रि का खाना तथा एक या दो बार हल्का नाश्ता लेते रहें ।

ii. आहार आयोजन में इतनी गुंजाइश होनी चाहिए कि आवश्यकतानुसार उसमें परिवर्तन हो सके । आहार में मौसम के अनुसार फल व सब्जियों का समावेश होना चाहिए ।

iii. आहार आयोजन एक पूर्व नियोजित पारिवारिक समस्या है, जिसका सीधा सम्बन्ध निम्न दो बिन्दुओं पर निर्भर करता  है:  

(1)पारिवारिक आय (Family Income),

(2)परिवार के सदस्यों की संख्या (Number of family members) ।

iv. आहार आयोजन करते समय गृहिणी का कर्तव्य है कि वह परिवार के प्रत्येक सदस्यों की राय लें तथा उनकी रुचियों की पूरी जानकारी रखें व निर्वाह करें ।

v. गृहिणी को प्रस्तावित दैनिक आहार तालिका का ज्ञान होना आवश्यक है तथा आहार आयोजन करते समय भोज्य वर्गों के अनुसार आयोजन करना चाहिए ।

vi. आहार आयोजन करते समय घर में व बाहर खाए जाने वाले समस्त आहार: चाय, कॉफी, तले हुए व्यंजन आदि की गणना भी करनी चाहिए क्योंकि कई स्नैक्स (Snacks) जैसे: चिप्स, बिस्कुट, समौसा, कचौड़ी आदि से काफी मात्रा में कैलोरी प्राप्त होती है ।

vii. आहार आयोजन करते समय परिवार के सभी सदस्यों की रुचियों व आवश्यकताओं को ध्यान में रखना चाहिए । किसी एक व्यक्ति की पसंद व नापसन्द को नहीं । परिवार में बच्चों, वृद्धों व रोगियों को आवश्यकता के अनुसार ही आहार आयोजन करना चाहिए ।

viii. पारिवारिक आय एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिन्दु है जिसको आहार आयोजन करते समय ध्यान में रखना अति आवश्यक है । पारिवारिक आय कम होने पर यह जरूरी नहीं है कि महँगे भोज्य पदार्थ ही गृहण किये जाएँ सस्ते व पौष्टिक भोज्य पदार्थों का आहार में समावेश किया जा सकता है ।

ix. आहार-आयोजन करते समय परिवार के सदस्यों के व्यवसाय व कार्य शैली को भी ध्यान में रखना चाहिए । दिमागी कार्य करने वाले को कम तथा अधिक मेहनत करने वाले को अधिक ऊर्जा प्रदान करनी     चाहिए । गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिला को अधिक पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता होती है ।

x. जहाँ तक सम्भव हो आहार आयोजन में आसानी से उपलब्ध होने वाले भोज्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए ।

xi. आहार आयोजन में ऐसे भोज्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए जो तृप्तिदायक हों । यदि किसी व्यक्ति को चावल से तृप्ति मिलती है तो उसको रोटी या पराठा रुचिकर नहीं लगेगा ।

xii. भोजन में कुछ रेशेदार पदार्थों का समावेश भी किया जाना चाहिए; जैसे: सुबह के नाश्ते में दलिया, दोपहर व रात के खाने में साबुत दालें आदि ।

xiii. आहार में 3-4 बार फल व सब्जियों का उपयोग करना चाहिए । यह आवश्यक है कि दिन में एक-दो बार फल व कच्ची सब्जियों का सलाद के रूप में प्रयोग हो ।

 

xiv. आहार आयोजन करते समय इस बात का भी ध्यान रखना आवश्यक है कि भोजन पकाने की कौन-सी विधि का उपयोग किया जाना चाहिए ।

xv. आहार आयोजन करते समय उसमें विविधता (Varieties) होनी चाहिए ।

यह निम्न प्रकार से की जानी चाहिए:

(i) आहार आयोजन करते समय हल्के व भारी व्यंजनों का उपयोग करना चाहिए ।

(ii) भोजन को भिन्न ढंगों से परोसना भी आहार आयोजन में शामिल करना चाहिए ।

(iii) आहार आयोजन करते समय मौसम को भी ध्यान में रखना चाहिए । गर्मी में हल्के व सुपाच्य भोजन तथा ठंड में तेल व मेवों का उपयोग किया जाना चाहिए ।

आहार आयोजन को प्रभावित करने वाले कारक: (Factor Affecting Meal Planning)

परिवार के लिये आहार आयोजन प्रभावित करने वाले कारक निम्न प्रकार हैं:

(1) पौष्टिक आवश्यकता (Nutritional Needs):

आहार आयोजन करते समय परिवार के सदस्यों की पौष्टिक आवश्यकता को ध्यान में रखना अत्यंत आवश्यक है । यह पौष्टिकता निम्न बातों पर निर्भर करती है:

 

आहार आयोजन आधारिक भोज्य वर्गों के अनुसार करना चाहिए । ICMR ने भारतीयों के लिए पाँच भोज्य वर्गों का उपयोग करने की सलाह दी है ।

(2) भौतिक कारक (Physiological Factors):

गृहिणी को आहार आयोजन करते समय इस बात का ध्यान अवश्य ही रखना चाहिए कि भोजन परिवार के सदस्यों में सन्तुष्टि उत्पन्न कर सके । भोजन की सन्तुष्टि (Satisfy value) उसमें उपस्थित पौष्टिक तत्वों की मात्रा व गुण पर निर्भर करता है; जैसे: यदि आहार में अधिक श्वेतसार का समावेश है तो उसका पाचन शीघ्र होगा तथा भूख भी जल्दी लगेगी ।

इसके स्थान पर यदि आहार में प्रोटीन व वसा की मात्रा अधिक है तो भोजन के पाचन में अधिक समय लगेगा तथा भूख देर से लगेगी । हम कह सकते हैं कि वसा व प्रोटीनयुक्त भोजन की सन्तुष्टि अधिक होती है । अत: भोजन का सन्तुष्टि मूल्य इसमें उपस्थित पौष्टिक तत्वों के प्रकार व मात्रा पर निर्भर करता है ।

(3) मनोवैज्ञानिक कारक (Psychological Factors):

भोजन देखने में इतना आकर्षक होना चाहिए ताकि भोजन के प्रथम अवलोकन से ही उसे गृहण करने की तीव्र इच्छा उत्पन्न हो ।

इसके लिए निम्न बातों का होना आवश्यक है:

(i) भोजन का आकर्षक होना

(ii) आंखों के लिए आनंददायक

(iii) उत्तम सुगन्ध वाला हो ताकि गृहण करने की इच्छा जाग्रत हो ।

उपरोक्त गुणों की अनुपस्थिति में भोजन ग्रहण करने की इच्छा मर जाती है । भोजन को ग्रहण करने की इच्छा व अनिच्छा उसकी बाह्य आकृति, बनावट, रंग, तरलता, स्वाद, सुगन्ध व भोजन के तापक्रम आदि से भी सम्बन्ध रखता है ।

(4) रुचि या पसन्द (Preference):

आहार आयोजन करते समय इस बात का भी ध्यान रखना आवश्यक है कि परिवार के सदस्य किन-किन भोज्य पदार्थों में अधिक रुचि लेते हैं । सामान्यतया परिवार के सभी सदस्यों की रुचि (preference) को ध्यान में रखकर ही मीनू तैयार करना चाहिए ।

(5) अन्य कारक (Other Factors):

भोजन से सम्बन्धित गलत धारणाओं में भी परिवर्तन करना आवश्यक है । भोजन सम्बन्धी आदतों का निर्माण हमारी संस्कृति, पारिवारिक रीति-रिवाज, धार्मिक विश्वास आदि से प्रभावित होते हैं ।

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