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The State of Indian Rivers

Read this article in Hindi to learn about the state of Indian rivers.

भारत में हमेशा से नदियों की पूजा की परंपरा रही है । अधिकांश नदियों के नाम देवताओं, देवियों या संतों के नाम पर हैं । लेकिन भारतीय जनता का एक बड़ा भाग, जिसमें नदियों के उपासक भी शामिल हैं, नदियों को प्रदूषित करने से पहले सोचते तक नहीं ।

नगरीकरण, औद्योगीकरश पानी की अत्यधिक निकासी, खेती से निकला जल, खेती के गलत तौर-तरीके तथा विभिन्न धार्मिक और सामाजिक रिवाज ये सब भारत में नदियों के प्रदूषण के कारण हैं । गंगा हो या यमुना, कावेरी हो या कृष्णा भारत की एक-एक नदी के साथ प्रदूषण की अपनी समस्याएँ हैं ।

गंगा और यमुना जैसे ही मैदानों में आती हैं सिंचाई के लिए नहरों के एक जाल के द्वारा पानी निकाला जाने लगता है जिससे आगे के मैदानी क्षेत्रों में रहने वालों के लिए पानी की मात्रा कम हो जाती है । अब इन नदियों में बहने वाला पानी नाले, चश्मों आदि का पानी होता है जो अपने साथ कचरा और औद्योगिक अपशिष्ट लेकर आता है ।

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बचा-खुचा ताजा जल प्रदूषकों को तनु नहीं बना पाता और नदियाँ बदबूदार नाले बन जाती हैं । केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक अध्ययनों से प्राप्त कड़ी के बावजूद सरकार इस मुद्‌दे को हल करने में नाकाम रही है । नगरों का गंदा पानी नदियों के 75 प्रतिशत प्रदूषण का कारण है जबकि बाकी 25 प्रतिशत प्रदूषण औद्योगिक अपशिष्टों और प्रदूषण के अनिश्चित स्रोतों का फल है ।

1995 में राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना का आरंभ हुआ । इसमें भारत की सभी नदियों की सफाई शामिल की गई । इनमें से अधिकांश योजनाओं में नालों को रोकने और सीवर का रुख मोड़कर नदी में उसके मिलने से पहले उसे शोधन संयंत्रों में पहुँचाना शामिल है ।

नदियों की सफाई के इन कार्यक्रमों का सबसे बड़ा दोष यह है कि वे यह तय कर पाने में असफल रहे हैं कि दीर्घकाल में शोधन की सुविधा का खर्च कौन उठाएगा । बिजली की अनिश्चित आपूर्ति और बिजली पर इन संयंत्रों की भारी निर्भरता के कारण अधिकांश संयंत्रों का पूरा उपयोग नहीं होता ।

इसके अलावा, खेती से निकले कचरे के कारण नदियों में होने वाले प्रदूषण की समस्या पर इन कार्यक्रमों में कोई ध्यान नहीं दिया गया है । यह योजना मार्च 2005 तक पूरी होनेवाली थी । 10 राज्यों के 46 नगरों में 18 नदियों से संबंधित इस योजना की स्वीकृत लागत 772.68 करोड़ रुपये थी । यह खर्च पूरी तरह केंद्र सरकार उठा रही है और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय इस योजना का समन्वय और निगरानी कर रही है ।

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इस योजना में प्रमुख कार्यकलाप नगरों और कस्बों के जल निकास से होनेवाले प्रदूषण का शोधन, गंदे पानी का शोध संयंत्र स्थापित करना बिजली के शवदाहगृह कम लागतवाली सफाई की सुविधाएँ, नदी के तटवर्ती भागों का विकास, वन-आरोपण और ठोस अपशिष्ट का प्रबंध है ।

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