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Measurement of Physical Quantity | Physics | Hindi

Read this article to learn about the measurement of physical quantity in Hindi language.

मापन:

भौतिकी के नियम भौतिक राशियों के रूप में व्यक्त किये जाते हैं । किसी भौतिक राशि का मापन एक संख्या के रूप में किया जाता है और उसके परिमाण का अंदाज उसके मात्रक से लगाया जाता है ।

इस प्रकार हम देखते हैं कि किसी भौतिक राशि का मापन दो भागों में होता है:

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1. संख्यात्मक:

संख्यात्मक भाग भौतिक राशि का माप है । यह केवल एक संख्या है ।

2. मात्रक:

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मात्रक का चुनाव भौतिक राशि के प्रकार पर निर्भर करता है उदाहरण: एक मेज को लम्बाई 1.50 मीटर है । इसका अर्थ है कि मेज की लम्बाई एक चुने हुए मात्रक (जैसे मीटर) से 1.50 गुनी है और लम्बाई के मापन के लिए मात्रक के रूप में मीटर का प्रयोग किया गया है ।

किसी मानक मात्रक के साथ सीधी तुलना प्रत्यक्ष मापन कहलाती है । इसके विपरीत पृथ्वी से चंद्रमा तक की दूरी सीधे मापन से ज्ञात नहीं हो सकती अत: अप्रत्यक्ष मापन विधि का प्रयोग आवश्यक हो जाता है । चंद्रमा की दूरी रेडार संकेत या लेसर किरण भेज कर वहां से परावर्तित संकेत ग्रहण करके मापी जा सकती है । अगर किरण के चंद्रमा तक पहुंचने और वापिस आने में लगा कुल समय “t” है तो

अर्थात S = C X t/2 (C = 3 X 108 मीटर / सेकेंड)

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छोटी तथा लंबी दूरियों को मापने के कुछ मात्रक इस प्रकार हैं:

i. फर्मी (f): 1 फर्मों = 10-5 मीटर

ii. आंगस्ट्रम (:1 आंगस्ट्रम = 10-10 मीटर

iii. प्रकाश वर्ष: 1 प्रकाश वर्ष = 9.46 x 1015 मीटर

iv. पारसेक: 1 पारसेक = 3.27 प्रकाश वर्ष = 3.08 x 1016 मीटर ।

(पारसेक वह दूरी है जहां से पृथ्वी की कक्षा की त्रिज्या एक सेंकड का कोण बनाती है (चित्र 4.1) ।

प्रत्येक भौतिक राशि के लिए एक सार्व भौतिक मात्रक निश्चित किया जाता है ।

एकमानक मात्रक के निम्न लक्षण होने चाहिए:

1. यह सुपरिभाषित तथा उपयुक्त मान का होना चाहिए ।

2. यह आसानी और शुद्धता से पुन: प्राप्य होना चाहिए ।

3. इसमें तापमान, दाब, समय व अन्य भौतिक मानकों के कारण परिवर्तन नहीं होना चाहिए ।

4. मात्रकों से इसकी तुलना सुविधाजनक होनी चाहिए ।

मूलभूत अन्य निरपेक्ष मात्रक प्रणाली:

कुछ मुख्य मात्रक प्रणालियां इस प्रकार हैं:

1. सी॰जी॰एस (सेंटीमीटर-ग्राम-सेकंड)

2. एम॰के॰एस॰ (मीटर-किलोग्राम-सेकंड)

3. एस॰आई॰ (अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली)

4. एफ॰पी॰एस (फुट-पांउड-सेंकड)

5. भारतीय प्रणाली (मन, सेर, छंटाक व तोला, माशा, रत्ती)

इनमें से पहली तीन प्रणालियां मुख्यत: उपयोग में लाई जाती हैं ।

1. सेंटीमीटर-ग्राम-सेकंड प्रणाली:

इस प्रणाली में लम्बाई सेंटीमीटर (मीटर का सौंवा भाग), द्रव्यमान ग्राम में (किलोग्राम का हजारवां भाग) तथा समय सेकंड में मापा जाता है ।

2. मीटर-किलोग्राम-सेकंड प्रणाली:

इस प्रणाली में लम्बाई मीटर में, द्रव्यमान किलोग्राम में तथा समय सेकंड में मापा जाता है । यह दोनों प्रणालियां फ्रांस की हैं ।

3. अंतराष्ट्रीय प्रणाली:

इस प्रणाली को 1960 में सभी देशों ने स्वीकार किया । इस प्रणाली में भौतिकी की विभिन्न शाखाओं जैसे यांत्रिकी, ऊष्मा, प्रकाशिकी, विधुत, इलेक्ट्रानिकी तथा चुंबकत्व आदि में प्रयुक्त मात्रक सम्मिलित हैं ।

मूलभूत एवं व्युत्पन्न मात्रक:

प्रत्येक भौतिक राशि के लिए अलग-अलग मात्रक याद रखना कठिन है । अत: कुछ राशियों को मूलभूत राशियां माना जाता है तथा उनके मात्रक मूलभूत मात्रक कहलाते हैं । सभी भौतिक मात्रक सात मूलभूत मात्रकों लम्बाई, द्रव्यमान, समय, तापमान, ज्योति तीव्रता, विद्द्युतधारा तीव्रता व पदार्थ परिमाण द्वारा व्यक्त किये जा सकते हैं ।

शेष सभी भौतिक राशियां इन्हीं मूलभूत राशियों के रूप में परिभाषित की जा सकती हैं और उनके मात्रक व्युत्पन्न मात्रक कहलाते हैं: जैसे वाट, कूलांब इत्यादि । वाट विद्युतशक्ति का मात्रक है । 1 वाट वह शक्ति है जो 1 वोल्ट विभवांतर पर 1 एम्पियर धारा प्रवाहित करने के लिए आवश्यक है ।

वाट = वोल्ट x एम्पियर

पदार्थ:

पदार्थ वह है जो स्थान घेरता है तथा जिसमें जड़त्व होता है । ईसा से 400 वर्ष पूर्व डेमोक्रिटस ने पदार्थ में परमाणु नामक अदृश्य एवं अविभाज्य कणों की कल्पना की थी ।

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