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World Strategic Vision | Hindi

Read this article in Hindi to learn about the world strategic vision from 1890-1950 in Hindi language.

कोलम्बस यूग के प्रारम्भ के साथ ही यूरोपीय के समुद्रतटीय देशों में पृथ्वी के विभिन्न भागों में उपनिवेश स्थापित करने की होड़ शुरू हो गई थी । अत: पृथ्वी के बारे मे नवीनतम ओर विस्तृत ज्ञान इन देशों की परम आवश्यकता बन गई ।

फलस्वरूप भूगोल केन्द्रीय महत्व का विषय बन गया । इसके पूर्व भूगोल की मुख्य उपयोगिता स्थानीय प्राकृतिक दशाओं के विश्लेषण के आधार पर क्षेत्रीय समस्याओ के निरूपण और समाधान पर केन्द्रित था । अब पृथ्वी की पूरी सतह भौगोलिक अध्ययन का एक समग्र विषय बन गई ।

भौगोलिक अध्ययन को पृथ्वी की सतह के समग्र अध्ययन के रूप में प्रतिष्ठित करने का कार्य हम्बोल्ड (1769-1859) और रिट्टर (1779-1859) के समय में पूर्णतया सम्पन्न हो चुका था । परिणामस्वरूप उन्नीसवीं सदी के अन्तिम दशक तक राजनीतिक भूगोल की चिन्तन धारा विश्वस्तरीय हो गई थी । यह बात महान, रैट्ज़ेल तथा मेकिंडर के विचारों से भली प्रकार स्पष्ट है ।

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उन्नीसवीं सदी के अंत तक पृथ्वी के सम्पूर्ण क्षेत्र का मानचित्र बनाया जा चुका था । अत: भूगोल के अध्येता अब सम्पूर्ण पृथ्वी को एक समग्र इकाई के रूप में देखने लगे थे । परिणामस्वरूप राज्यों के क्षेत्रीय विस्तार सम्बन्धी सम्भावनाओ और समस्याओं का आकलन करना सम्भव हो गया ।

उन्नीसवीं सदी का अन्तिम चरण यूरोपीय राज्यों के बीच उपनिवेशीय विस्तार की होड़ अपने चरमोत्कर्ष पर थीं । यूरोपीय सामुद्रिक शक्तियों के उपनिवेशवादी विस्तार का यही इतिहास रैटज़ेल के राजनीतिक भौगोलिक चिन्तन तथा महान और मैकिंडर की विश्व सामरिक परिदृष्टियों का मूल प्रेरणा सोत था ।

इतिहास के किसी भी दौर में युद्ध कोशल तथा सामरिक चिन्तन धारा तत्कालीन संचार तकनीक तथा आवागमन के प्रचलित साधनों पर निर्भर है । इतिहास के कोलम्बसीय दौर के पूर्व नौपरिवहन आन्तरिक जलाशयों तथा सरिताओं तक ही सीमित था ।

अत: युद्ध की सारी प्रक्रिया स्थलीय आवागमन पर निर्भर थी तथा ऊंट और घोड़े इसके द्रुततम साधन थे । वाष्पचालित जलयानों के विकास तथा कोलम्बस और वास्कोडागामा की यात्राओं के बाद अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक प्रभुत्व विस्तार की दृष्टि से सामुद्रिक यातायात सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो गया था ।

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बीसवीं सदी में रेल इंजन तथा स्वचालित वाहनों (ऑटोमोबिल) के आविष्कार के साथ स्थल यातायात में व्यापक परिवर्तन आया । सामरिक चिन्तन पर इसका दूरगामी प्रभाव पड़ा । ध्यातव्य है कि 1930 के दशक तक युद्ध की सारी प्रक्रिया भूतल यातायात (सरफेस ट्रांसपोर्ट) पर आधारित थी चाहे वह स्थल यातायात हो अथवा समुद्री यातायात ।

तीस के दशक में वायुयानों के विकास ओर उनके प्रयोग के साथ ही स्थिति एकदम बदल गई । यद्यपि अधिकांश छोटे-बड़े युद्ध अभी भी स्थल अथवा समुद्र के रास्ते होते रहे, किन्तु अब यह स्पष्ट हो गया था कि किसी भी युद्ध में वायु यातायात की निर्णायक भूमिका होगी ।

अत: मोटे तौर पर हम कह सकते हैं कि 1940 के पूर्व सम्पूर्ण सामरिक चिन्तनधारा भूतल यातायात पर आधारित थी । तत्पश्चात् वायु यातायात और अणुशक्ति चालित पनडुब्बी (अथवा “सबसरफेश” जलयान) इस चिन्तन के महत्वपूर्ण आधार बन गए ।

ध्यातव्य है कि सतह यातायात के दौर में व्यवहार के स्तर पर पृथ्वी की कल्पना एक समतल क्षेत्र के रूप में की जाती थी अतएव सम्पूर्ण सामरिक चिन्तन तदनुरूप था । 1940 के बाद पृथ्वी का गोलाकार स्वरूप सामरिक चिन्तन का मूलाधार बन गया यद्यपि मैकिंडर की सामरिक संकल्पना का महत्व यथावत् बना रहा ।

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