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Role of an Individual in the Prevention of Pollution

Read this article in Hindi to learn about the role of an individual in the prevention of pollution.

मनुष्य के कार्यकलाप से पर्यावरण संबंधी अनेक समस्याएँ पैदा होती हैं । अगर समस्याओं का प्रत्युत्तर देना है तो हमें मानना होगा कि हम जिस पर्यावरण में रहते हैं उसको बेहतर बनाने के लिए हममें से हर व्यक्ति जिम्मेदार है । हमारी निजी क्रियाएँ पर्यावरण की गुणवत्ता को या तो कम करती हैं या बढ़ाती हैं । अनेक लोगों को लगता है कि प्रौद्योगिकी से पर्यावरण संबंधी समस्याएँ जल्द हल की जा सकती हैं ।

अधिकांश व्यक्ति और भी स्वच्छ पर्यावरण चाहते तो हैं, पर बहुत-से लोग अपनी जीवनशैली में ऐसे बड़े परिवर्तन लाने को तैयार नहीं जो पर्यावरण को और स्वच्छ बनाएँ । किसी एक व्यक्ति के फैसले और काम बहुत हद तक अन्य व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता का निर्धारण करते हैं । इसके लिए यही आवश्यक नहीं कि व्यक्ति पर्यावरण संबंधी विभिन्न मुद्‌दों तथा पर्यावरण पर अपने कार्यों के प्रभावों के बारे में सजग हों, उन्हें पर्यावरणीय नैतिकता पर आधारित जीवनशैली को अपनाने का भी पक्का संकल्प करना होगा ।

सौर ऊर्जा की मदद से, अरबों वर्षों में विकसित हुई प्राकृतिक प्रक्रिया अनंत काल तक ऊपरी मृदा, जल, वायु, वनों, घास के मैदानों और वन्यजीवन का नवीकरण कर सकती है जिन पर जीवन के सभी रूप निर्भर हैं । लेकिन तभी तक यह संभव है जब तक इन नवीकरणीय संसाधनों का उपयोग उनकी भरपाई की गति से अधिक गति से न हो ।

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प्राकृतिक प्रक्रियाएँ कुछ अपशिष्टों को मंद, विघटित और पुनर्चालित कर सकती हैं, बशर्ते हम उन पर अधिक बोझ न डालें । प्राकृतिक प्रक्रियाएँ बिना किसी लागत के बाढ़ नियंत्रण और मिट्‌टी के कटाव की रोकथाम करती हैं । हमें संसाधनों का महत्त्व जानकर उनका निर्वहनीय उपयोग करना चाहिए ।

व्यक्तियों को पर्यावरण और मानव जीवन को बेहतर बना सकने में योगदान देने वाली कुछ धारणाएँ इस प्रकार हैं:

i. हम जीवन के सभी रूपों का सम्मान करें ।

ii. हर व्यक्ति को चार बुनियादी प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास करना चाहिए:

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a. मैं जिन वस्तुओं का उपयोग करता हूँ वे कहाँ से आती हैं ?

b. मैं जहाँ रहता हूँ उस स्थान के बारे में क्या जानता हूँ ?

c. पृथ्वी से और अन्य सजीव वस्तुओं से मेरा क्या संबंध है ?

d. मनुष्य के रूप में मेरा उद्‌देश्य क्या है और दायित्व क्या है ?

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iii. जहाँ भी संभव हो पेड़ लगाएँ और उससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह कि उनकी देखभाल करें । ये वायु प्रदूषण कम करते हैं ।

iv. जहाँ भी संभव हो, लकड़ी और कागज की वस्तुओं का उपयोग कम करें । कागज-उत्पादन से प्रदूषण फैलता है तथा ऑक्सीजन छोड़ने और कार्बन डाइआक्साइड लेनेवाले वनों का विनाश होता है । कागज की   वस्तुओं के पुनर्चालन का प्रयास करें और जहाँ भी संभव हो, पुनर्चालित कागज का उपयोग करें ।

v. जो डाक आपको मिलती है उसके अधिक से अधिक लिफाफों को पुनः काम में लाएँ ।

vi. टीक और महोगनी जैसी उष्णकटिबंधीय कड़ी लकड़ी से बने फर्नीचरों, दरवाजों और खिड़कियों को न खरीदें । ये लकड़ियाँ जंगलों से प्राप्त होती हैं ।

vii. अपने घर के पास के ह्रासमान क्षेत्र के पुर्नजन्म में सहयोग दें और वनरोपण कार्यक्रम में भाग लें ।

viii. घर में अत्यधिक आवश्यक होने पर ही कीटनाशकों का प्रयोग करें और कम मात्रा में करें । कीड़ों की कुछ प्रजातियाँ अन्य प्रजातियों की जनसंख्या-वृद्धि पर रोक लगाने में सहायक हैं ।

ix. अपने पास की दुकान से जैविक कृषि से उत्पन्न सब्जियों और फलों को रखने की बात कहकर जैविक कृषि का प्रचार करें । इससे कीटनाशकों का प्रयोग अपने आप कम हो जाएगा ।

x. थोड़ी दूरी पैदल तय करके, कार पूल का उपयोग करके, बाइक में भागीदारी करके और सार्वजनिक यातायात का उपयोग करके जीवाश्म ईंधनों का प्रयोग कम करें । इससे वायु प्रदूषण कम होता है ।

xi. आवश्यकता न हो तो पंखे और बल्व बंद कर दें ।

xii. एरोसोल स्प्रे की वस्तुओं और व्यापारिक वायुशोधकों का प्रयोग न करें । ये ओजोन पर्त को हानि पहुँचाते हैं ।

xiii. नाली में या जमीन पर कीटनाशक, पेंट, तेज व हानिकारक रसायनों वाली अन्य वस्तुएँ न गिराएँ ।

xiv. टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएँ खरीदें, उनको अधिक से अधिक चलाएँ और उन्हे फेंकने की बजाय, जहाँ तक हो सके उनकी मरम्मत कराएँ । ऐसी वस्तुएँ आम तौर पर भूभरावों में पहुँचती हैं और भूमिगत जल को             प्रदूषित करती हैं ।  

xv. उपभोक्ता वस्तुएँ फेंके जानेवाले डिब्बों या बोतलों की जगह काँच के फिर से भरने योग्य मर्तबानों में खरीदें ।

xvi. रिचार्ज योग्य बैटरियों का प्रयोग करें ।

xvii. घर के सामान, सब्जियाँ या अन्य वस्तुएँ खरीदें तो प्लास्टिक के थैले न माँगें । अपना कपड़े का थैला इस्तेमाल करें ।

xviii. कागज के बदले कपड़े के नैपकिनों, तौलियों और रूमालों का और स्पंज का प्रयोग करें ।

xix. फिर से इस्तेमाल होने वाली कप-प्लेटें उपलब्ध हों तो कागज और प्लास्टिक की कप-प्लेटें न खरीदें जिनको फेंक दिया जाता है ।

xx. अखबारों, काँच, एल्यूमिनियम और दूसरी ऐसी वस्तुओं का उपयोग करें जिन्हें डीलर पुनर्चालन के लिए लेते हैं । अपने क्षेत्र में ऐसे डीलरों का पता लगाने में आपको थोड़ी असुविधा अवश्य होगी ।

xxi. अपने बाग में या छत पर कंपोस्ट डिब्बा बनाएँ और रासायनिक खादों का उपयोग कम करने के लिए अपने पौधों के लिए आवश्यक खाद इसी से बनाएँ ।

xxii. अपने क्षेत्र में कचरे को अलग-अलग डालने और पुनर्चालन कार्यक्रम के आरंभ के लिए प्रचार करें ।

xxiii. ऐसी वस्तुएँ चुनें जिनको पैक न करना पड़े या कम से कम पैक करना पड़े ।

xxiv. अपने मुहल्ले में कंपोस्टिंग या कृमि-कंपोस्टिंग के व्यक्तिगत या समुदायिक संयंत्र आरंभ करें और लोगों को उसमें भाग लेने के लिए प्रेरित करें ।

xxv. सड़कों और आसपास की जमीनों पर केवल यह सोचकर कूड़ा मत डालें कि नगरपालिका का सफाईकर्मी तो इसे साफ कर ही देगा । कूड़े को कूड़ेदान में डालने का ध्यान रखें या फिर उसे अपने घर में ही सही    ढंग से ठिकाने लगाइए ।

xxvi. इसे समझें कि आप सब कुछ नहीं कर सकते और दुनिया की हर समस्या का हल नहीं निकाल सकते । इसलिए पर्यावरण का जो मुद्‌दा आपको सबसे ज्यादा उद्‌वेलित करता हो, उसी पर ध्यान केंद्रित करके आप अवश्य कुछ कर सकते हैं । एक मुद्‌दा विशेष पर अपनी शक्ति केंद्रित करके आप बेहतर परिणाम पा सकते हैं ।

xxvii. हमारे देश में मौजूद अनेक गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) में आप किसी के सदस्य बन सकते हैं या स्वयंसेवक बन सकते हैं । प्रदूषण की रोकथाम के सकारात्मक दृष्टिकोणों पर विचार के लिए स्थानीय समुदाय की छोटी-छोटी सभाएँ आयोजित करें ।

xxviii. अपने क्षेत्र की जैव-विविधता का ज्ञान प्राप्त करें और प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक संपदा के बारे में जानें । इससे आपके अदंर अपने नगर/कस्बे/गाँव के बारे में गर्व की भावना जागृत होगी और उनके संरक्षण के बारे में आनेवाली समस्याओं को समझने में भी आपको सहायता मिलेगी ।

xxix. मतदान में भाग लीजिए । आपके पास बाद में शिकायत करने के बजाय निर्णय लेने का विकल्प मौजूद है ।

xxx. असफलता का पहला संकेत मिलते ही आप हिम्मत न हारें । नकारात्मक पक्षों पर जोर न दें बल्कि दुनिया को रहने की एक बेहतर जगह बनाने के लिए जो कुछ सकारात्मक हो सके, वह आप करें ।

xxxi. निर्वाचित प्रतिनिधियों से बातचीत करते समय विनम्रता और बुद्धि से काम लें । किसी विशेष रवैये से आपका मतभेद हो सकता है, लेकिन मतभेद भी सम्मान के साथ सामने रखें । उग्र ढंग से विरोध करके आप कुछ खास हासिल नहीं कर सकते ।

xxxii. ध्यान रहे कि आपका कर्म आपके वचन के अनुसार हो । याद रखें, पर्यावरण के संरक्षण का कार्य आपसे आरंभ होता है ।

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