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Eating Disorder during Adolescence | Hindi

Read this article in Hindi language to learn about the issues of eating disorder during adolescence.

भोजन या खानपान सम्बन्धी विकार अधिकांशतया पुरुषों व स्त्रियों की हर आयु वर्ग में देखा गया है ।

परिभाषा:

खानपान सम्बन्धी विकार का वर्णन इस प्रकार कर सकते हैं: यह विकार का एक समूह है । जिसमें आहार का सम्बन्ध व्यक्ति के शारीरिक व भावात्मक अनियमितताओं से होता है । इसका शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है । खानपान से सम्बन्धित विकार हर आयु व लिंग में देखा जाता है परन्तु किशोरावस्था, पूर्व प्रौढ़ावस्था तथा महिलाओं में विकार सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं ।

खानपान सम्बन्धी विकारों के कारण निम्न प्रकार हैं:

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i. व्यक्तिगत (Personal),

ii. वातावरण (Environmental),

iii. मनोवैज्ञानिक (Psychological),

iv. शारीरिक (Physical),

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v. सामाजिक (Social) ।

किशोरावस्था के दौरान अनेकों परिवर्तन होते हैं जिससे दबाब (Stress), घबराहट या व्याकुलता (Confusion) तथा भविष्य को लेकर चिंता (anxiety) अधिक प्रबल होती है । शारीरिक परिवर्तनों के कारण स्वयं की पहचान, स्वयं के लिये अल्प आदर (Low self esteem) तथा अपने मित्रों से तुलना की भावना अधिक होती है ।

जिसका प्रभाव उनके शारीरिक, मानसिक, भावात्मक तथा मनोवैज्ञानिक स्तरों पर पड़ता है । पूर्व किशोरावस्था में सामाजिक व वातावरण में होने वाले परिवर्तनों का भी प्र भाव पड़ता है, जिसका कारण, स्कूलों में परिवर्तन, मित्र समूह तथा सम व विपरीत लिंगों में रुचि लेना होता है ।

कभी-कभी किशोरावस्था के थोड़े से समय में ही बड़े-बड़े परिवर्तन देखे जाते हैं क्योंकि इस समय किशोर अधिक दबाव व अव्यवस्थित अवस्था में होता है । उनको महसूस होता है कि उनका अपने आस-पास के वातावरण में हो रहे परिवर्तनों का ज्ञान अधूरा है ।

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आहार सम्बन्धी विकार निम्न प्रकार हैं:

(1) एनोरेक्सिया नरवोसा (Anorexia Nervosa),

(2) बुलीमिया नरवोसा (Bulimia Nervosa)

(3) बिन्गी आहार विकार या मोटापा (Binge Eating Disorder or Obesity)

एनोरेक्सिया नरवोसा तथा बुलीमिया नरवोसा के सामान्यतया लक्षण एक ही होते हैं जिसमें व्यक्ति सोचता है कि वह मोटा होता जा रहा है तथा उसके शरीर में अधिक वसा जमा हो रही है और वह अपने भोजन की मात्रा में कटौती करने लगता है जिसके दुष्प्रभाव से उसका सामान्य जीवन प्रभावित होता है ।

इसके साथ-साथ इस विकार से पीड़ित व्यक्ति के मुख्य जीवान्त अंग धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं और अपना कार्य करना बन्द कर देते हैं । जहाँ तक  बिन्गी आहार विकार की विशेषता देखें तो यह एनोरेक्सिया नरवोसा से थोड़ा भिन्न होता है । अत: इसे आहार विकार जो कि अन्य कहीं वर्णित न हो (EDNOS) कहते हैं ।

(1) एनोरेक्सिया नरवोसा:

इसे आम भाषा में एनोरेक्सिया (Anorexia) कहते हैं । यह एक मनोवैज्ञानिक खान-पान सम्बन्धी विकार है । जो लोग एनोरेक्सिया नरवोसा से पीड़ित होते हैं वे सोचते हैं कि वे मोटे हो रहे हैं चाहे उनका भार सामान्य भार से कम हो । ऐसे लोग अपना भार नियंत्रित करने के लिये अपेक्षित भोजन की मात्रा में कटौती करने लगते हैं । शीघ्र परिपक्व किशोरों में यह विकार अधिक देखा जाता है ।

किशोरावस्था में भावात्मक परिवर्तनों के कारण किशोर-किशोरियाँ अत्यन्त भावुक हो जाते हैं तथा अपने आप को सुन्दर व आकर्षक दिखाने के लिये शारीरिक भार को नियंत्रित करने लगते हैं । ये छोटे-छोटे अन्तराल पर अपने वजन की जाँच करते रहते हैं कि कहीं वे मोटे तो नहीं हो रहे हैं ।

ऐसे व्यक्ति अपने भार को नियंत्रित करने के लिये निम्न उपाय अपनाते हैं:

i. कुछ भोज्य पदार्थ अत्यन्त कम मात्रा में खाते हैं ।

ii. आहार पर अत्यधिक नियंत्रण करते हैं ।

iii. अत्यधिक व्यायाम करते हैं ।

iv. शरीर से पानी निकालने की दवाईयों का सेवन करते हैं ।

एनोरेक्सिया नरवोसा के कारण निम्न प्रकार हैं (Specialty of Anorexia Nervosa):

(i) अत्यधिक पतलापन (extreme thinness or emaciation)

(ii) वजन बढ़ने का अधिक भय ।

(iii) अपने रंगरूप, सुन्दरता व आकर्षण को बनाये रखने के लिए अत्यधिक वजन नियन्त्रण के दुष्परिणामों को गम्भीरता से न लेना ।

(iv) किशोरियों व महिलाओं में रजोधर्म (Menstruation) में कमी ।

(v) खान-पान में अत्यधिक नियन्त्रण ।

एनोरेक्सिया नरवोसा से पीड़ित को मनोवैज्ञानिक सलाहकार से इलाज करवाना चाहिए । कुछ किशोर या पीड़ित एक ही बार सलाह लेने में विकार मुक्त हो जाते है तथा जिन लोगों में यह विकार लम्बे समय (Chronic) से चला आ रहा है उन्हें अधिक समय तक चिकित्सक की सलाह लेनी पड़ती है । एनोरेक्सिया नरवोसा यदि दीर्घ कालीन है तो उसका दुष्प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा पड़ता है ।

एनोरेक्सिया नरवोसा के लक्षण (Symptoms of Anorexia Nervosa):

i. अस्थियाँ पतली हो जाती हैं ।

ii. बाल व नाखून टूटने लगते हैं ।

iii. शरीर की त्वचा सूखी हो जाती है तथा उसका रंग पीला हो जाता है ।

iv. पूर शरीर पर पतले बालों की वृद्धि होने लगती है ।

v. अल्प रक्ताल्पता (Mild Anemia) माँसपेशियों का क्षय (Muscle Wasting) तथा कमजोरी महसूस होती है ।

vi. तीव्र कब्ज दुटफ्टाट (Severe constipation) की समस्या होती है ।

vii. अल्प रक्त चाप, नाड़ी व श्वाँस की गति धीमी हो जाती है ।

viii. शरीर का आंतरिक तापक्रम सामान्य से गिर जाता है जिससे व्यक्ति को हमेशा ठंड लगती रहती है ।

ix. हर समय थकान (Lethargy) लगती है

x. प्रजनन शक्ति (Infertility) क्षय होने लगती है

(2) बुलीमिया नरवोसा:

यह भी एक मनोवैज्ञानिक आहार सम्बन्धी विकार है । कुछ किशोर व किशोरियाँ सोचते हैं कि उन्हें कोई प्यार नहीं करता तथा उनका ध्यान आकर्षित करने के लिये अत्यधिक मात्रा में खाना खाने लगते हैं और मोटे हो जाते हैं ।

ये लोग अपने आहार पर नियंत्रण नहीं रख पाते तथा थोड़ी-थोड़ी देर में अधिक मात्रा में खाना खाते हैं । यह विकार एनोरेक्सिया नरवोसा की तुलना में एकदम विपरीत होता है । इसमें व्यक्ति का स्वास्थ्य या सामान्य भार (weight) होता है परन्तु कभी-कभी भार थोड़ा अधिक भी हो सकता है ।

इस विकार से पीड़ित किशोर व किशोरियों को बढ़ते हुए वजन का डर नहीं रहता । ये अपना वजन कम करने की तीव्र इच्छा रखते हैं परन्तु ऐसा कर नहीं पाते । अधिकांश किशोर व किशोरी अपने शरीर के आकार से असंतुष्ट रहते है ।  

बुलीमिया नरवोसा के लक्षण (Symptoms of Bulimia Nervosa):

i. गले के अन्दर तीव्र खराश (Chronically inflamed and Sore throat)

ii. लसिका ग्रथियों गर्दन व जबड़ों में सूजन आ जाती है ।

iii. दाँत का एनामेल (Enamel) झड़ने लगता है । दाँतों में संवेदना तथा सदन पैदा होती है । ये दुष्प्रभाव आमाशय के  अम्ल के सम्पर्क में आने से होता है । मानसिक तनाव आमाशय में अधिक  अम्ल का स्त्राव होने से होता है ।

iv. आमाशय व आँतों से सम्बन्धित समस्यायें होती हैं क्योंकि आमाशय में अस्लीय रिफ्लेक्स विकार उत्पन्न हो जाता है ।

v. अधिक जुलाब लेने से आन आँतों में खरोंच आ जाती है ।

vi. शरीर से जल का निष्कासन अधिक होता है जिससे तीव्र शुष्कीकरण (Severe Dehydration) हो जाता है ।

vii. इलैक्ट्रोलाइट का संतुलन बिगड़ जाता है । नमक, कैल्शियम, पोटेशियम या अन्य खनिज लवणों का स्तर या तो एक दम कम हो जाता है या बहुत अधिक हो जाता है । इसके कारण हृदय घात (Heart attack) हो जाता है ।

(3) बिन्गी आहार विकार या मोटापा:

इस विकार में व्यक्ति (किशोर) जरूरत से बहुत अधिक मात्रा में भोजन ग्रहण करते हैं । ऐसे व्यक्ति अपनी आदतों को नियंत्रित करने में शक्ति रहित होते हैं । अत: आवश्यकता से अत्यधिक भोजन ग्रहण करने को बिन्गी आहार विकार या मोटापा कहते हैं । बिन्गी आहार विकार के लक्षण उत्तर किशोरावस्था या पूर्व प्रौढ़ावस्था में शुरू होते हैं ।

बिन्गी आहार विकार के सामान्य लक्षण (Symptoms of Binge Eating Disorder):

i. मोटापे से पीड़ित व्यक्ति अधिकतर अपना पूरा एक वक्त का भोजन खाने के पश्चात् अर्थात् पेट भरा होने के बाद भी, भूख न होने पर भी खाना खाते जाते हैं ।

ii. बिन्गी आहार विकार से पीड़ित लोग जल्दी-जल्दी ज्यादा से ज्यादा खाना खाते हैं ।

iii. इससे यह ज्ञात नहीं होता कि वे क्या खा रहे हैं, कितना खा गये तथा खाने का स्वाद कैसा है । उनको इन बातों से कोई मतलब नहीं होता बस वे अधिक से अधिक भोजन खाते जाते हैं ।

iv. इस विकार से पीड़ित लोग किसी प्रकार का ज्यादा व्यायाम, व्रत या इच्छा से वमन नहीं करते हैं जैसाकि बुलीमिया से पीडित व्यक्ति करते हैं ।

बिन्गी आहार विकार के भावात्मक लक्षण (Emotional Symptoms):

i. ऐसे व्यक्ति जब दबाब व तनाव की स्थिति में होते हैं तो वे अधिक खाना खाते है ।

ii. ये लोग चाहे जितना भी खाना खा लें फिर भी संतुष्ट नहीं होते ।

iii. अधिक खाना खाते समय इन लोगों को कुछ भी महसूस नहीं होता; जैसे: उनका ध्यान केवल खाने पर केन्द्रित रहता है या वे अपने आप को ऑटो चलाने वाला समझ कर खाते रहते हैं ।

iv. अधिक खाने के पश्चात् ये खिन्न या हतोत्साहित हो जाते हैं ।

v. ये व्यक्ति आहार आदतों या भार नियंत्रण करने की आशा छोड़ देते हैं ।

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