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Dark Room: Position and Construction | Radiology | Hindi

Read this article to learn about the things we need to consider before constructing a dark room in Hindi language.

डार्क रूम का स्थान रेडियोलॉजी विभाग में प्रमुख है । खराब एक्स-रे फिल्मों का कारण बहुत हद तक डार्क रूम में अपनायी गयी गलत तकनीक होती है, न कि खराब ट्‌यूब एक्सपोजर और रेडियोग्राफिक तकनीक । डार्क रूम में पूर्ण अन्धकार न होकर कार्य करने हेतु सेफ इलुमिनेशन होना आवश्यक है । डार्क-रूम को प्रोसेसिंग रूम भी कहा जा सकता है ।

स्थिति:

डार्क-रूम समय की बचत करने के लिए रेडियोग्राफी कमरे के सटा होना चाहिए । यदि दो या अधिक रेडियोग्राफिक कमरे हों, तो इसे मध्य में होना चाहिए । किसी भी परिस्थिति में डार्क-रूम गर्म व सीलनयुक्त वेसमेंट में नहीं होना चाहिए ।

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आकार व निर्माण:

डार्क रूम काफी बड़े आकार (100वर्ग फीट जमीन तथा 11 फीट ऊंचाई) का होना चाहिए । जिससे सभी उपयुक्त उपकरण बिना भीड़-भाड़ के आ सकें । इन उपकरणों में लोडिंग बेन्य, और प्रोसेसिंग टैंक प्रमुख हैं ।

सूखा तथा गीला कार्य करने हेतु दोनों में उचित दूरी होनी चाहिए । अत: लोडिंग बेन्य और प्रोसेसिंग टैंक कमरे के विपरीत कोनों में स्थित होने चाहिए । प्रोसेसिंग घोल का निर्माण हमेशा प्रोसेसिंग रूम से बाहर होना चाहिए तथा इस कार्य के लिए जरूरत की चीजें भी बाहर ही रखनी चाहिए ।

निर्माण की आवश्यकतायें:

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क. विकिरण से बचाव:

रेडियोग्राफी रूम के पास होने के कारण इसका विकिरण से सुरक्षित होना अति आवश्यक है । अत: दीवारों का लेड इक्विवालेंट फिल्मों को फागिंग से बचाने में समर्थ होना चाहिए । दीवार के ऊपर लेड की परत या कोई अन्य पदार्थ जो 1.5 मिमी॰ लेड की मोटाई का विकिरण बचाव 100 किलोवोल्ट पर कर सकें, का प्रयोग किया जाना चाहिए ।

ख. फर्श:

फर्श टिकाऊ, आसानी से साफ हो सकने वाली, न फिसलने वाली और धब्बों व रसायनों के प्रभाव से सुरक्षित होनी चाहिए । पोर्सलीन की सिरेमिक टाइल्स या प्राकृतिक क्ले बहुत उपयुक्त होती है । साधारण लाइनोलियम क कन्क्रीट पर प्रोसेसिंग रल्यूशन का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है । अत: ये प्राय: अनुपयुक्त होती है ।

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ग. दीवार की परत:

डार्क-रूम की दीवार का काला होना आवश्यक नहीं है । अत: रंग का चुनाव यह देखकर करते हैं जो सेफ लाइट का अधिकतम परावर्तन कर सके । दीवारों पर रसायन रोधी परत होनी चाहिए जैसे पेन्ट, वार्निश, कन्क्रीट या सिरेमिक टाइल्स ।

हवा की व्यवस्था:

खिड़कियां प्राय: नहीं बनाते हैं, क्योंकि उन्हें प्रकाश रोधी बनाना कठिन होता है । एयर कण्डीशनिंग सबसे उत्तम रहती है । यदि पंखें का प्रयोग किया जा रहा है तो हवा अन्दर कमरे में भेजनी चाहिए न कि बाहर, जिससे कमरे में पोजीटिव प्रेशर बन सके और धूल अन्दर न आ सके ।

बिजली के तार:

डार्क-रूम में प्रोसेसिंग सन्धान, पानी के पाइपों, गीली र्फ्ता व नेन्यै उंगलियों के आस-पास बिजली के तार होने पर झटके की संभावना बढ़ जाती है । अत: इन्हें सुरक्षित ढंग से रखना चाहिए तथा सभी धातु वाली वस्तुओं को अर्थ कर दिया जाना चाहिए ।

पास बॉक्स:

यह लोडिंग बेन्च के पास स्थित होना चाहिए । पास बॉक्स में दो प्रकाश व एक्स-रे रोधी दरवाजे होते हैं जो इस प्रकार व्यवस्थित होते हैं, कि दोनों एक ही समय नहीं खोले जा सकें । पास बॉक्स को एक्सपेग्ड तथा अनएक्सपोज्ड फिल्मों के लिए दो भागों में बांट दिया जाता है ।

आने का रास्ता (इन्ट्रेन्स):

सबसे साधारण इन्ट्रेन्स प्रकाश रोधी अकेला दरवाजा है, जिसमें अन्दर से बन्द करने की व्यवस्था होनी चाहिए । अन्य प्रकार के इन्द्रेन्स से एक छोटा हाल जिसमें इलेक्ट्रानिक ताले युक्त दो दरवाजे होते हैं । इसकी व्यवस्था इस प्रकार होती है कि एक दरवाजा तभी खुलता है जब दूसरा पूर्णत: बन्द हो चुका हो ।

अत: यह प्रकाशरोधी दरवाजे की तरह, कार्य करता है । अन्य इन्द्रेन्स “मेज” प्रकार का भी हो सकता है । इसमें कोई दरवाजा नहीं होता है । इसमें फर्श आदि के निर्माण में अधिक धन लगने के कारण यह आजकल प्रयोग नहीं किया जाता है । आजकल अधिकता से प्रयोग होने वाला इइर रिवात्नित्रा दरवाजा है जो बहुत कम स्थान ग्रहण करता है, तथा काफी आसान व प्रकाश रोधी होता है ।

इलुमिनेशन:

डार्क-रूम में तीन प्रकार का इलुमिनेशन होना चाहिए:

1. सेफलाइट (सुरक्षित प्रकाश):

डार्क-रूम में प्रकाश की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें काम किया जा सके तथा वह फिल्मों की फागिंग न करे । सेफलाइट में उपस्थित फिल्टर उपयुक्त प्रकाश प्रदान करते हैं । सेफ लाइट और फिल्मों के बीच कम से कम 1.2 मीटर का फासला होना चाहिए तथा बल्व उतने ही वाट का लगाना चाहिए जितना उसके खोल पर लिखा हुआ है । (प्राय: पन्द्रह वॉट से कम) ।

सुरक्षित प्रकाश की जांच:

सेफ लाइट की समय-समय पर जांच करते रहनी चाहिए । एक अच्छे डार्क-रूम में एक  अनएक्सपोज्ड फिल्म पर कोई धातु का सिक्का रख देते हैं । अब सेफलाईट को भिन्न समय के लिए 30 सेकेण्ड, 1 मिनट, 2 मिनट, तथा 4 मिनट के लिए भिन्न स्थानो पर जलाते हैं । उस एक्सपोजर समय को लिख लेते हैं जिससे सिक्के की आउटलाइन हल्की सी प्रोसेस करने पर फिल्म पर बनती है ।

यह अधिकतम समय है जो बिना फागिंग के सेफलाइट में काम करने में लगाया जा सकता है । यह ध्यान रखना चाहिए कि  अनएक्सपोज्ड फिल्मों की अपेक्षा एक्सपोल्ड फिल्म आठ गुना ज्यादा सेन्सिटिव होती      है । अत: एक्सपोजर के बाद फिल्मों को चुने गये समय के 1/10 दें समय से अधिक सेफ लाइट में नहीं एक्सपोज करना चाहिए ।

2. सामान्य प्रकाश:

एक ओवरहेड प्रकाश की व्यवस्था सामान्य कार्यो जैसे सफाई, व सन्धान आदि बदलने हेतु होनी चाहिए ।

3. रेडियोग्राफिक इल्यूमिनेशन:

एक फ्लोरेसेन्ट इलूमिनेटर की व्यवस्था गीली फिल्मों को देखने हेतु वांशिग कमार्टमेन्ट के ऊपर ही होनी चाहिए । जिससे सल्यूशन एक-दूसरे से मिल न सके ।

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