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3 Main Division of Nervous System | Zoology | Hindi

Read this article to learn about the three main divisions of nervous system in Hindi language.

1. केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र:

मस्तिष्क तथा स्पाइनल कार्ड दोनों, हड्डीयों के ढांचे में स्थित होते हैं जो इन कोमल रचनाओं की रक्षा करते हैं । इसके अतिरिक्त मस्तिष्क व स्पाइनल कार्ड मेम्ब्रैन जिसे मेनेन्जीज कहते है, से ढके होते हैं ।

मेनेन्जीज तीन तरह की होती है:

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डआमैटर, एरेल्मायड मैटर एवं पायामेटर । इन दोनों के मध्य एरेक्नायडमैटर स्थित होती है । इन्हीं के अनुसार सबदरा स्पेस, डयूरा और एरेक्नायड मैटर के बीच, सबएरेक्नायड स्पेस एरेक्नायड और पायामैटर के बीच स्थित होती है । मेनेन्जीज की सूजन मेनेज्जाइटिस कहलाती है ।

स्पाइनल कार्ड द्वितीय लम्ब्ररवर्टिब्रा तक होती है, जबकि मेनेन्जीज फाइलम टर्मिनल के रूप में बढ़ कर तृतीय सेकल वर्टिब्रा के लेवल पर डयूरामेटर से मिलती है । इससे तृतीय लम्वर वर्टिब्रा के नीचे सबएरेक्नायड स्पेस से सेरेव्रोस्पाइनल द्रव को सुई की मदद से स्पाइनलकार्ड को बिना हानि पहुंचाये निकाला जा सकता है ।

सेरेव्रोस्पाइनल द्रव:

यह एक विशेष द्रव है जो सबएरेक्नायड स्पेस में स्थित होता है, इसका निर्माण मस्तिष्क के वेन्ट्रिकिलों में कारोयड प्लेक्सस (Choroid Plexus) द्वारा होता है । सी. एस.एफ. मस्तिष्क व स्पाइनल कार्ड के रक्षा कवच का कार्य करता है तथा खाद्य एवं रासायनिक पदार्थो के लेन-देन में माध्यम का कार्य करता है ।

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सामान्य सी.एस.एफ. रंगहीन, प्रोटीन व कोशिका रहित द्रव्य है जिसमें PH 7.3 होता है, दाब 10-20 से मी. पानी के दाब के बराबर व आयतन 120-150 मिली. होता है । सी॰एस॰एफ॰ के अधिक इकट्ठा होने से हाइड्रोकिफेलस (Hydrocephalus) हो जाता है, जो सी॰एस॰एफ॰ संचार के मार्ग में रुकावट की वजह से हो सकता है । रुकावट के पहले के वेन्ट्रिकिल का दाब बढ जाता है तथा वे बड़े हो जाते हैं, फलस्वरूप बच्चों में या नवजात शिशुओं में हाइड्रोकिफेलस हो सकता है जिनमें कपाल के जोड़ बन्द न हुये  हों ।

मस्तिष्क:

वयस्कों में मस्तिष्क का वजन लगभग 1.0-1.5 किलोग्राम होता है । मस्तिष्क के न्यूरानों में माइटोसिस केवल जन्म के पूर्व ही होती है । मस्तिष्क के आकार में वृद्धि जन्म के पहले आठ वर्षों में बहुत तीव्र गति से होती है तथा 18 वर्ष में वयस्क आकार का हो जाता है ।

मस्तिष्क के मुख्य भाग (चित्र 3.74)

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सेरेब्रम (Cerebrum)

डायेनकिफेलान (Diencephalon)

मिडब्रेन (Midbrain)

सेरेबेलम (Cerebellum)

पान्स (Pons)

मस्तिष्क का प्रत्येक भाग तंत्रिका कोशिकाओं (Gray Matter) तथा तंत्रिका तंतुओं व ट्रेक्टों (White Matter) से मिलकर बनता है ।

संवेदनीय तंत्र:

शरीर के भिन्न भागों से सतह तथा गहराई से संवेदनायें केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को भिन्न सेन्सरी या अफरेन्ट तन्तुओं द्वारा पहुंचायी जाती हैं । इसके अतिरिक्त विशेष संवेदनायें (दृश्य, श्रवण  व स्वाद) सेन्सरी रिशप्टरों द्वारा त्वचा या गइराई की रचनाओं से ग्रहण की जाती हैं ।

स्पाइनल कार्ड की पास्टीरियर रूट से दर्द, ताप, स्पर्श, दाब और प्रोप्रियोसेप्सन की संवेदनायें जाती हैं । प्रोप्रियोसेप्सन वह संवेदना है जो पेशीयों, जोड़ों, लिगामेंट तथा टेन्डनों आदि से जोड़ या भाग की स्थिति और गति का अनुभव कराते हैं ।

इन संवेदनों को ग्रहण करने हेतु कई तरंगों को सेरेवल कार्टेक्स (पोस्ट सेन्ट्रल गाइरस) पहुंचाना होता है । उदाहरण के लिए चित्र 3.82 में कुछ सेंसरी पाथवेज के डार्सल हार्न न्यूरान से सेरेब्रल कार्टेक्स में जाते दिखाया गया है ।

परिधीय तंत्रिका तंत्र:

इसके अन्तर्गत 12 जोड़े क्रेनियल नर्व और 31 जोड़े स्पाइनल नर्व आती हैं ।

क्रेनियल नर्व:

मस्तिष्क की सतह के नीचे से 12 जोड़ी नर्व निकलती हैं (चित्र 3.83) । उन्हें उनकी संख्या तथा नामों से भी जाना जाता है । संख्या उनकी आगे से पीछे की ओर उत्पत्ति के आधार पर तथा नाम, उनके वितरण व कार्य से संबंधित हैं ।

कुछ नर्व केवल सेंसरी या मोटर है तथा कुछ दोनों प्रकार के तंतुओं से बनी होती हैं । उन्हें मिक्सड प्रकार (मिलीजुली) की कहते हैं ।

उन वालक क्रियाओं में जिनमें मस्तिष्क भाग नहीं लेता है, तथा वे स्पाइनल कार्ड एक सेसरी व मोटर न्यूरान भाग लेता है, स्पाइनल रिफलेक्स कहलाता है ।

रिफलेक्स जिसमें केवल दो न्यूरान भाग लेते हैं, मोनोसिनेप्टिक रिफलेक्स कहलाता है और इसका उदाहरण टेन्डन रिफलेक्स है । अन्य रिफलेक्सों में पालीसिनेप्टिक या फ्लेक्सर रिफलेक्स होते हैं जैसे प्लान्टर रिफलेक्स और विदड्राल रिफ्लेक्स जो दर्द युक्त स्टीमुलस से होता है ।

मोटर पाथवे:

मोटर मूवमेंट के लिए तरंगें मोटर कार्टेक्स के न्यूरान (प्रोसीट्रल गाईरस) से पैदा होती है । कार्टिकोस्पाइनल ट्रैक्ट या है पिरैमिडल ट्रैक्ट मुख्य डिसेण्डिंग मोटर ट्रैक्ट हैं । तंतु इन्टरनल कैप्सूल, मिड ब्रेन, पान्स और मेकुरा से होकर गुजरते हैं । मेडुला में तंतु दूसरे तरफ क्रास कर पिरेमिड बनाते है अन्त में मोटर तंतु सीधे या इन्टरन्यूरान द्वारा एन्टीरियर हार्न में समाप्त होते हें ।

सेरेब्रल कार्टेक्स में मोटर न्यूरानों को अपर मोटर-राय तथा स्टीरियर हार्न के मोटर न्यूरानों को लोअर मोटर न्यूरान कहते हैं । इस पाथ में कोई खराबी से मोटर डेफीसिट तथा पैरालिसिस हो जाती है । लोअर मोटरन्यूरान से फ्लेसिड पैरालिसिस होती है जबकि अपर मोटर न्यूरान की खराबी से स्पास्टिक पैरालिसिस होती है ।

(i) अल्फैक्ट्री नर्व:

यह घ्राण के लिए होती है । यह केवल सेंसरी नर्व है जिसके न्यूरान अल्फैक्ट्री म्यूकोसा में स्थित होते हैं । इसके एक्तान पहले किवीफार्म प्लेट जो इथेमोयड बोन में होती है से निकलकर फ्रन्टललोब की निचली सतह पर स्थित अल्फैक्ट्री वल्व तक जाती है । प्रत्येक वत्व से तंत्रिका तंतु पीछे की ओर अन्त में कार्टेक्स के टेम्योरल लोब में पहुंचते है ।

आप्टिक नर्व:

यह एक सेंसरी नर्व है जो आंख की रेटिना से निकलती है । कपाल में पहुंचने के पश्चात् दोनों आप्टिक नर्व मिलकर आप्टिक कियेज्या बनाती हैं । प्रत्येक नर्व के कुछ तंत्रिका तंतु (नेजलरेटिना) क्रासकर उस तरफ के आप्टिक ट्रैक्ट की तरफ आगे बढ़ते हैं ।

इस प्रकार प्रत्येक आप्टिक ट्रैक्ट में प्रत्येक रेटिना में कुछ तंतु होते हैं । अधिकतर आप्टिक तंतु थेलेमस (लैट्रल जैनीकुलेट) में समाप्त होते हैं । जहां से नये तंतु (जेनिकुलो-कैलक्रीन) विजुवल कार्टेक्स पहुंचते हैं । कुछ आदिक दैक्ट के तंतु सुपिरियर कालीकुलस में समाप्त होते हैं, जहां से वे अन्तिम रूप से बाहरी आंख की पेशियों से संधि बनाते हैं ।

(iii) आकुलोमोटर:

यह प्योर मोटर (Pure motor) नर्व है जो मिडब्रेन के वेट्रल सरफेस पर स्थित कोशिकाओं से निकलकर आंख की भिन्न पेशियों तक जाती है ।

(iv) द्रोक्लीयर:

यह मिडब्रेन से निकलने वाली प्योर मोटरनर्व है जो आंख की सुपीरियर ओबलीक पेशी को सप्लाई करती है ।

(v) ट्राइजेमाइनल:

यह तीन सेंसरी शाखाओं में मिलकर बनी होती हैं । आप्थैलमिक, मैक्जलरी,  मैन्डीबुलर । यह मिक्सड नर्व है जो सिर की त्वचा व म्यूकोसा से व दांतों से तरगें, गैसेरियन गैंगलिया को ले जाती है जो टेम्पोरलबोन के बीट्रस भाग में स्थित होता है ।

गैंगलिया से तंतु पान्स में स्थित सेंसरी केन्द्रक को पहुंचते हैं । सेंसरी केन्द्रक के ठीक मध्य की तरफ पांचवी क्रेनियल नर्व का मोटर केन्द्रक स्थित होता है जहां से तंतु चबाने की पेशियों को जाते हैं । ट्राइजेमाइनल नर्व का दर्द बहुत ही कष्टप्रद स्थिति है जिससे आराम नर्व के पास्टीरियर रूट पर स्थित गैसेरियन या सेमील्यूनर गैंगलिया को नाक कर पाया जा सकता है क्योंकि इसमें इन नर्व की तंत्रिका कोशिकायें (सेल बाडी) स्थित होती हैं ।

(vi) एवडुसेन्ट नर्व:

यह प्योर मोटर नर्व है । जिसके न्यूरान पान्स में स्थित होते हैं । इससे मोटर तंतु आंख की लैट्रल रेक्टस पेशी को जाते हैं ।

(vii) फेसियल नर्व:

यह एक मिक्सड नर्व है जो चेहरे की सुपरफीसियल पेशियों की मोटर तंतु में जाती है तथा सबमैक्जलरी और सबलिंगुअल लार ग्रन्यियों को भी सप्लाई करती है । जीभ के अगले 2/3 भाग की स्वाद ग्रन्थियों में सेंसरी तंतु इसी के द्वारा जाते हैं ।

(viii) वेस्टीबुलो कोक्लीयर नर्व:

यह सेंसरी नर्व है जिसके दो भाग होते हैं । वेस्टीबुलर भाग द्वारा वेस्टीबुलर एप्रेटस (Vestibular Apparatus) से सेंसरी तंतु संतुलन की (Sense of Balance) की संवेदना को सेरेबेलम तक ले जाते हैं । काक्लियर भाग काक्लिया से श्रवण संवेदना ले जाता है ।

(ix) ग्लासोफेरन्जियल नर्व:

यह एक मिक्सड नर्व है । इसके मोटर तंतु कण्ठ के कुछ पेशियों व पैरोटिड ग्रन्यि की कोशिकाओं को सप्लाई करते है । सेंसरी तंतु मुंह से संवेदनायें व पिछली 1/3 जीभसेस्वाद संवेदना मस्तिष्क को पहुंचाते हैं ।

(x) वेगास नर्व:

यह एक मिक्सड नर्व है जो काफी विस्तृत रूप से सप्लाई करती हें । इसके सेंसरी तंतु कण्ठ, स्वर यंत्र, ट्रैकिया, हृदय, कैराटिड बाडी, फेफड़ों, श्वास नली व पाचन नली को सप्लाई करते हैं । इनकी सेल बाडी जुगलर गैंगलिया में स्थित होते हैं ।

सैंसरी एकजान मेंडुला (न्यूक्लियस सालिटेरियस) और पान्स में समाप्त होते हैं । मोटर तंतु मेंडुला में स्थित वेगरा के डार्सल मोटर न्यूक्लियस से निकलकर आटोनामिक गैंगलिया को तथा वहां से पोस्टगैगलियानिक तंतु कण्ठ, स्वर यंत्र की पेशियों व सीने और उदर के बिसरा को जाते हैं ।

(xi) एसेसरी नर्व:

यह प्योर मोटर नर्व है । इसके कुछ तंतु मेहुल । में तथा कुछ छठे सर्वाइकल सेगमेन्ट के एण्टीरियर हार्वे न्यूरान से निकल रो हैं । यह ट्रेपेजियम तथा स्टरनोक्लीडो मैस्टायाड पेशियों को मोटर सप्लाई करता है ।

(xii) हाइपोग्लासल नर्व:

यह मेडुला से निकलने वाली मोटर नर्व है जो जीभ की पेशियों को सप्लाई करती है । कुछ रचना वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें जीभ के सेंसरी तंतु भी होते हैं ।

III स्वत: निर्देशी तंत्र:

यह तंत्र चेतन नियंत्रण (Conscious Control) में नहीं होता है अत: हृदय, स्मूथमसल ग्रन्यियों की क्रियाओं को नियंत्रित करता है । इसका उन भागों तथा क्रियाओं से भी सम्बन्ध रहता है जो चेतन नियंत्रण में होती हैं । यह तंत्र मस्तिष्क के नियंत्रण में कार्य करता है तथा इसमें मुख्य रूप से इफरेन्ट तंतु आते हैं जो मस्तिष्क व स्पानलकार्ड के कुछ भागों से गुजरते हैं । ये तंतु केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र के बाहर के अन्य तंतुओं से संनिध (Synapse) करते हैं । इन नर्व सेलों को गैंगलिया कहते हैं ।

स्पाइनल कार्ड के तंतु माईलिन युक्त होते हैं तथा प्रोगैंगलियानिक तंतु कहलाते हैं तथा पोस्टगैंगलियानिक तंतु माइलिन युक्त नहीं होते हैं । आटोनामिक तंत्र के अफरेन्ट तंतु संख्या में अपेक्षाकृत कम होते हैं । वे विसरा से मस्तिष्क व स्पाइनल कार्ड को जाते हैं तथा उनकी तरंगें भूख, मितली व दर्द की संवेदना कराती हैं । स्वत: निर्देशी तंत्र को दो भागों में बांटा गया है । सिम्पैथेटिक व पैरासिम्पैथेटिक ।

(a) सिम्पैथेटिक तंत्र:

प्रीगैगलियानिक तंतु स्पाइनल कार्ड के वेट्रल रूट से पहले थोरेसिक से तीसरी या चौथी लम्बर स्पाइनल नर्व के साथ निकलते हैं । ये पैरासिम्पैथेटिक गैंगलियान चेन से मिल जाते हैं जो गर्दन के ऊपरी भाग से पेल्विस तक मध्य में स्थित होता है ।

प्रीगैंगलियानिक तंतु या तो ट्रंक के गैंगलिया में संधि बनाते हैं या आगे बढ़कर सिम्पैथेटिक नर्व प्लेक्सस के गैंगलिया में स्थित नर्वसेल से संधि बनाते हैं ।

तीन मुख्य सिम्पैथेटिक लेक्सस निम्न हैं:

1. कार्डियक प्लेक्सस – हृदय व फेफड़े के लिए

2. सीलियक प्लेक्सस – उदर के अंगों को

3. इन्फीरियर हाइपोगैस्टिक प्लेक्सस – पेलिवस के अंगों के लिए ।

सिम्पैथेटिक ट्रकों से पोस्टगैंग लियानिक तंतु स्पाइनल नर्व से जुड़कर रक्त नलियों की खूथ पेशियों को तथा त्वचा की पसीने की, ग्रन्धियों को सप्लाई करती हैं ।

कार्य:

(i) हृदय-दर व कान्टेस्सन फोर्स बढ़ाना ।

(ii) कोरानरी धमनियों एवं ऐच्छिक पेशियो को जाने वाली धमनियों को चौड़ा करना ।

(iii) त्वचा व पाचन नली की रक्त नलिकाओं को सिकोड़ना । अरेक्टर पाइलोरम के कान्टैक्सन से बाल खड़े हो जाते हैं तथा पसीना निकलता है ।

(iv) एड्रीनल मेडुला से एड्रीनेलिन निकलने के लिए उत्तेजित करता है ।

(v) श्वास नली तथा आंख की प्यूपिल को फैलाता है ।

(vi) मूत्राशय की पेशियों को आराम कराता है । तथा अमाशय और आंत की मोटेलिटी घटाता है । यह सारी स्थितियों एड्रेनेलिन के स्राव से भी हो सकती है तथा ये शरीर को उत्तेजना व कठिनाई के लिए तैयार करते हैं ।

(b) पैरासिम्पैथेटिक तंत्र:

इसके प्रीगैंगलियानिक तंतु मस्तिष्क के कुछ क्रेनियल नव, के साथ तथा स्पानल कार्ड से दूसरी, तीसरी तथा चौथी सेक्रल नर्व के साथ निकलते हैं । इस आउटफ्लो को क्रनियोसेक्रल आउटफ्लो कहते हैं । ये प्रीगैंगलियानिक तंतु उन गैंगलियान में पहुंचते हैं जो सप्लाई होने वाले अंग के पास स्थित होते हैं । क्रेनियल नर्व जिनमें ये तंतु पाये जाते हैं: आकुलोमोटर, फेसियल, ग्लासोफैरन्तियल और वेगस हैं ।

ओकुलोमोटर सिलियरी पेशी तथा आइरिस के स्फिन्क्टर पेशियों को सप्लाई करते हैं जो आंख के एकोमोडेसन और प्यूपिल के सिकुड़ने में काम आती हैं । फेसियल के प्रीगैंगलियानिक तंतु लेक्राइमल ग्रन्थि सबमैडिवुलर व सबलिगुअल लार ग्रन्थियों को सप्लाई करते हैं तथा लार स्राव के लिए उत्तेजित करते हैं ।

वेगस हृदय गति कम करती है । कोरोनरी धमनियों को तथा श्वास नली को सिकोड़ती है । ये प्रिंगैंगलियानिक तंतु मूत्र व मल त्याग के समय स्फिन्क्टरों को ढीला करते हैं तथा पाचन रसों का स्राव बढ़ाते हैं ।

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