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Growth of a Child in Hindi | Home Science

Read this article in Hindi language to learn about the meaning, definition and laws of growth of a child.

वृद्धि का अर्थ: (Meaning of Growth)

वृद्धि से तात्पर्य है:

शरीर की लम्बाई तथा भार में वृद्धि होना । अत: शरीर का आकार व भार बढ़ता है । विकास शारीरिक विकास तक ही सीमित नहीं रहता है । विकास लगातार परिवर्तित होता रहता है जब तक शरीर पूर्णरूप से परिपक्व न हो जाये ।

वृद्धि का अर्थ है:

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बढ़ना अर्थात् वृद्धि के परिवर्तनों में मात्रात्मक परिवर्तन होते हैं जो कि आकार व संरचना से सम्बन्धित होते हैं । मुख्यतया कह सकते हैं कि वृद्धि का परिमाणात्मक परिवर्तन से भी सम्बन्ध होता है ।

वृद्धि की परिभाषा: (Definition of Growth):

हरलॉक ने वृद्धि को इस प्रकार परिभाषित करते हुए लिखा है कि, ”गर्भ धारण के बाद ही गर्भस्थ शिशु के आकार एवं संरचना में वृद्धि होने लगती है । यह वृद्धि परिपक्वावस्था तक चलती रहती है । वृद्धि बालक के शरीर और संरचना में ही नहीं होती है, बल्कि यह उसके आन्तरिक अंगों और मस्तिष्क में भी होती है । मस्तिष्क में जैसे-जैसे वृद्धि होने लगती है, बालक में सीखने, स्मरण एवं तर्क आदि की अधिक क्षमता आती जाती है ।”

हरलॉक द्वारा दी गई परिभाषा से एक बात स्पष्ट हो जाती है कि वृद्धि मात्रात्मक परिवर्तन है तथा विकास गुणात्मक परिवर्तन है । एक अन्य वैज्ञानिक कारमाइकेल ने विकास को भी मात्रात्मक परिवर्तनों के रूप में स्वीकार किया है । अत: वृद्धि व विकास को एक-दूसरे से अलग समझना कठिन है ।

वृद्धि के नियम: (Laws of Growth):

वृद्धि सिर से शुरू होकर पैर पर समाप्त होती है । सर्वप्रथम बालक के सिर व चेहरे वाले भागों में वृद्धि होती है, उसके पश्चात् धड़ तथा पैरों के भाग में वृद्धि होती है ।

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वृद्धि के नियम को निम्न प्रकार से अवलोकन किया जा सकता है:

(i) वृद्धि हमेशा पास से दूर की ओर प्रवृत्त होती है (Growth Proceeds from Near to Far):

वृद्धि पहले केन्द्र वाले भागों में होती है उसके पश्चात् दूर के भागों में होती है । उदाहरण के लिए सर्वप्रथम कन्धों, फिर कोहनी, कलाई तथा सबसे अन्त में हाथों की अगुलियों में उपस्थित माँस पेशियों में परिपक्वता आती है ।

(ii) वृद्धि निरन्तर और क्रमानुसार होती है (Growth is Continuous and Orderly):

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वृद्धि हमेशा निश्चित क्रम के अनुसार होती है । बालक में वृद्धि निरन्तर होती है परन्तु वृद्धि की गति तीव्र व धीमी हो सकती है ।

(iii) वृद्धि हमेशा सरल से जटिल की ओर होती है (Growth Always Proceeds from Simple to Complex):

बालक के पूरे शरीर की सामान्य वृद्धि पहले होती है उसके पश्चात् विशेष अंगों की वृद्धि होती है ।

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